समाचार · मध्य प्रदेश
विदिशा में आरक्षण-UGC नियमों के खिलाफ प्रदर्शन:पुलिस से झूमा-झपटी, वाटर कैनन चलाया; SC-ST एक्ट में बदलाव की मांग, SDM को ज्ञापन दिया
विदिशा में शनिवार को सर्व समाज एकता मंच के आह्वान पर यूजीसी के नए नियमों, आरक्षण व्यवस्था और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर बंद रखा गया। पीतल मिल, रामलीला क्षेत्र और मुख्य बाजार में दुकानें बंद रहीं। प्रदर्शनकारी रैली निकालकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने तिलक चौक, देवी के बाग और स्वामी विवेकानंद चौराहे पर बैरिकेडिंग की थी। उनके आगे बढ़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर कलेक्ट्रेट पहुंचे। ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से आर्थिक आधार पर आरक्षण देने, मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करने, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और सवर्ण आयोग के गठन की मांग रखी। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी योजनाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में ऐसे बदलाव की मांग की। जिससे एक ही परिवार को बार-बार लाभ मिलने के बजाय अन्य जरूरतमंद परिवारों को भी अवसर मिल सके। 'आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिले' वहीं, भाजपा नेता शशांक भार्गव ने कहा- सर्व समाज के साथ मिलकर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने और जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। चाहे वे किसी भी समाज से हों। भार्गव ने कहा- सरकार किसी भी दल की हो। यदि कोई नीति आम जनता के हित में नहीं है तो उसका विरोध होना चाहिए। उन्होंने कानून बनाते समय सामाजिक समरसता का ध्यान रखने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग सर्व समाज एकता मंच के सदस्यों ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग भी उठाई। उनका आरोप था कि कानून के कथित दुरुपयोग को रोकने और निर्दोष लोगों को परेशानी से बचाने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कानून से जुड़े मामलों में कथित फर्जी शिकायतों और आर्थिक सहायता के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा- सरकार को कानून और नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। ताकि विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच असंतोष की स्थिति न बने। परवेंद्र शर्मा बोले- मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन बढ़ाएंगे सपाक्स के जिला सचिव परवेंद्र शर्मा ने कहा- सर्व समाज एकता मंच के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था में सुधार, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देने जा रहे थे। लेकिन उन्हें रास्ते में रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा- यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को देशभर में आगे बढ़ाया जाएगा। UGC नियम वापस लेने, सवर्ण आयोग बनाने की मांग प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने और सवर्ण आयोग का गठन करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि आरक्षण, कानून और शैक्षणिक नियमों से जुड़े फैसले लेते समय सभी वर्गों के हितों और सामाजिक समरसता का ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रखने से लेकर रैली निकालने और ज्ञापन सौंपने तक प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के संबंध में प्रशासन का पक्ष सामने आने पर खबर अपडेट की जाएगी।