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UP MLC Election: BJP सांसद का वोटर लिस्ट से नाम गायब, फॉर्म भरने के बाद भी नहीं डाल सके वोट, क्या है पूरा मामला?

UP MLC Election: लोकतंत्र में एक-एक वोट की अहमियत होती है. लेकिन जब जनप्रतिनिधि का नाम ही मतदाता सूची से गायब हो जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है. झांसी में इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव के दौरान ऐसा ही मामला सामने आया. झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद अनुराग शर्मा मतदान करने पहुंचे, लेकिन सूची में नाम नहीं मिलने के कारण वोट नहीं डाल सके. सांसद ने बताया कि उन्होंने फॉर्म भी भरा था. इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) ने मतदाता सूची की खामियों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा. अब सवाल है कि फॉर्म भरने के बावजूद नाम सूची से कैसे छूट गया?
मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने से नहीं कर सके मतदान
शुक्रवार को स्नातक एमएलसी चुनाव के दौरान भाजपा सांसद अनुराग शर्मा का नाम मतदाता सूची में नहीं मिला. इस वजह से वह मतदान नहीं कर पाए. सांसद के मुताबिक, वह हर बार मतदान करते थे. इस बार भी उन्होंने फॉर्म भरा था. इसके बावजूद सूची में उनका नाम दर्ज नहीं हुआ. उन्होंने आशंका जताई कि फॉर्म भरने की प्रक्रिया में कोई कमी या तकनीकी समस्या रह गई होगी.
सपा ने उठाए मतदाता सूची पर सवाल
सांसद का नाम सूची में नहीं मिलने के बाद सपा ने चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सपा के पूर्व सांसद चंद्रपाल सिंह यादव ने बीकेडी के पास पार्टी के बस्ते पर मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि जब भाजपा सांसद का ही नाम मतदाता सूची से छूट गया, तो आम मतदाताओं के साथ क्या हुआ होगा. उन्होंने सूची को अपूर्ण बताते हुए दावा किया कि सपा के मुद्दे सही हैं. साथ ही, उन्होंने चुनाव में सपा प्रत्याशी की जीत की उम्मीद जताई.
पहले भी सामने आई थीं नामों में गड़बड़ियां
स्नातक एमएलसी चुनाव से ठीक एक दिन पहले मतदाता सूची में नामों की गड़बड़ी का मामला सामने आया था. सोशल मीडिया पर वायरल हुई सूची में मतदाताओं और उनके पिता के नाम गलत दर्ज होने की शिकायतें थीं. कुछ नामों में आपत्तिजनक और असामान्य शब्द भी दर्ज मिले थे. पूरे निर्वाचन क्षेत्र में ऐसे करीब 30 मामले सामने आने की जानकारी दी गई. इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर के निर्देश पर मतदाता सूची में सुधार कराया गया था.
सांसद का नाम छूटने से फिर चर्चा में आई सूची
नामों में गड़बड़ी को लेकर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि मतदान के दिन भाजपा सांसद का नाम सूची में नहीं मिलने का मामला सामने आ गया. इससे मतदाता सूची की शुद्धता और नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल उठने लगे. सांसद ने इसे संभावित तकनीकी समस्या बताया, जबकि सपा ने इसे चुनावी व्यवस्था की खामी करार दिया. अब इस घटना ने मतदाता सूची तैयार करने और उसमें नाम दर्ज होने की प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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