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इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा अपडेट: इस तारीख को साफ होगा कब होंगे UP पंचायत चुनाव 2026, राज्य निर्वाचन आयोग ने तेज की तैयारी

UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में 24 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी. लंच के बाद संबंधित डिवीजन बेंच के नहीं बैठने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 सितंबर को होने की जानकारी सामने आई है. इस मामले में कुल नौ याचिकाएं एक साथ सुनी जा रही हैं.
24 अगस्त को क्यों नहीं हुई सुनवाई?
24 अगस्त को पंचायत चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में प्रस्तावित थी. लेकिन लंच के बाद बेंच नहीं बैठी, जिसके कारण याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो सकी. यानी सुनवाई किसी पक्ष की दलील पूरी होने या मामले को खारिज किए जाने के कारण नहीं टली, बल्कि बेंच के नहीं बैठने की वजह से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई.
अब 9 सितंबर को क्या होगा?
24 अगस्त की सुनवाई टलने के बाद अब अगली सुनवाई 9 सितंबर को होने की जानकारी है. ऐसे में पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की नजर इस तारीख पर टिक गई है. हालांकि, सिर्फ सुनवाई की तारीख तय होने का मतलब यह नहीं है कि उसी दिन चुनाव की तारीख घोषित हो जाएगी. अदालत के आदेश और राज्य सरकार तथा राज्य निर्वाचन आयोग के जवाब के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
नौ याचिकाओं पर होगी सुनवाई
पंचायत चुनाव से जुड़े अलग-अलग मामलों को एक साथ सुनने की प्रक्रिया चल रही है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कुल नौ याचिकाएं समय पर पंचायत चुनाव कराने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने से जुड़े मुद्दों को चुनौती देती हैं. लखनऊ पीठ में लंबित चार जनहित याचिकाओं को भी मुख्य न्यायाधीश के आदेश से इलाहाबाद स्थित प्रधान पीठ में स्थानांतरित किया गया था.
जस्टिस अजीत कुमार और गरिमा प्रसाद की पीठ
इन मामलों की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच कर रही है. 24 अगस्त को भी इसी पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन लंच के बाद बेंच नहीं बैठने के कारण कार्यवाही नहीं हो सकी.
पंचायत चुनाव में देरी पर पहले भी सख्त हुई अदालत
पंचायत चुनाव में देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले भी सवाल उठा चुका है. अदालत ने सरकार से यह बताने को कहा था कि पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की गई. अदालत ने अगली बार चुनावी प्रक्रिया समय से काफी पहले शुरू करने की टिप्पणी भी की थी.
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर भी विवाद
इस पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का सरकारी फैसला है. जून में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना था और चुनाव कराने की समयसीमा तथा ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया पर भी सरकार से जानकारी मांगी थी.
ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट बनी अहम कड़ी
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण भी महत्वपूर्ण है. पिछली कार्यवाही में ओबीसी आयोग से रिपोर्ट को लेकर अदालत के सामने स्थिति रखी गई थी. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आयोग ने सभी जिलों का दौरा और प्रक्रिया पूरी करने में समय लगने की बात कही थी. यही वजह है कि आरक्षण प्रक्रिया को पंचायत चुनाव की समयसीमा से जोड़कर देखा जा रहा है.
मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इंतजार
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायत निर्वाचन 2025-26 के तहत मतदाता सूची और उससे संबंधित पुनरीक्षण प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध है. आयोग की ओर से 2026 में त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावलियों के वृहद पुनरीक्षण से जुड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं. इससे यह स्पष्ट है कि चुनावी प्रक्रिया से संबंधित प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं, लेकिन मतदान कार्यक्रम की अंतिम घोषणा अलग विषय है.
भावी प्रत्याशियों की बढ़ी बेचैनी
पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशी लंबे समय से चुनाव कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं. हर सुनवाई के साथ उन्हें उम्मीद रहती है कि अदालत से चुनाव कराने को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकता है. 24 अगस्त को सुनवाई नहीं होने से यह इंतजार एक बार फिर बढ़ गया.
26 नवंबर की समयसीमा क्यों चर्चा में?
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की व्यवस्था को लेकर छह महीने की अवधि का मुद्दा भी इस विवाद के केंद्र में है. यदि 26 मई 2026 से छह महीने की अवधि को आधार माना जाए तो 26 नवंबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण हो जाती है. हालांकि, चुनाव की वास्तविक समयसीमा और प्रशासनिक व्यवस्था पर अंतिम स्थिति अदालत के आदेश तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों से ही तय होगी.
चुनाव कब होंगे, अभी कोई आधिकारिक तारीख नहीं
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदान तारीख का कोई आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है. राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायत निर्वाचन से जुड़ी तैयारियां और मतदाता सूची संबंधी सूचनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रसारित अलग-अलग मतदान तारीखों को आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम नहीं माना जा सकता.
9 सितंबर पर टिकी सभी की नजर
अब 9 सितंबर की प्रस्तावित सुनवाई इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी. अदालत नौ याचिकाओं, पंचायत चुनाव में देरी, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई करेगी. लेकिन उस दिन क्या आदेश आएगा और क्या अदालत चुनाव की समयसीमा को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश देगी, यह सुनवाई के बाद ही सामने आएगा.
क्या 9 सितंबर को मिलेगा चुनाव का रोडमैप?
भावी प्रत्याशियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगली सुनवाई में हाईकोर्ट राज्य सरकार से पंचायत चुनाव का स्पष्ट रोडमैप मांगेगा या चुनाव कराने की समयसीमा तय करने की दिशा में कोई आदेश देगा. फिलहाल 24 अगस्त की सुनवाई बेंच के नहीं बैठने के कारण टल चुकी है और अब अगली सुनवाई की ओर सभी की निगाहें हैं. इसलिए 9 सितंबर की कार्यवाही यूपी पंचायत चुनाव 2026 की आगे की दिशा तय करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
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