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लुधियाना में मेडिकल स्टोर से 49 हजार ट्रामाडोल बरामद:खरीद का रिकॉर्ड नहीं देने पर संचालक अरेस्ट; MRP और एक्सपायरी भी मिटाई
लुधियाना में अवैध रूप से प्रिस्क्रिप्शन दवा ट्रामाडोल का स्टॉक रखने के मामले में ड्रग कंट्रोल विभाग ने लुधियाना पुलिस के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई की है। मोती नगर इलाके के एक मेडिकल स्टोर से 49 हजार ट्रामाडोल टैबलेट बरामद की गई हैं। बरामद दवाओं की कीमत करीब 9.31 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक पवन कुमार निवासी शहीद भगत सिंह कॉलोनी को गिरफ्तार कर लिया है। ड्रग कंट्रोल इंस्पेक्टर, लुधियाना जोन-3 नवदीप सिंह संधू की शिकायत पर थाना मोती नगर में आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 22, 61 और 85 के तहत केस दर्ज किया गया है। सूचना मिलने पर मेडिकल स्टोर की जांच
ड्रग कंट्रोल विभाग को सूचना मिली थी कि मेडिकल स्टोर पर ट्रामाडोल का अवैध स्टॉक रखा गया है। इसके बाद अधिकारियों की टीम ने पुलिस की मदद से शहीद भगत सिंह नगर स्थित मेडिकल स्टोर की जांच की। इस दौरान स्टोर के संचालक पवन कुमार की मौजूदगी में तलाशी ली गई। जांच में 49 हजार ट्रामाडोल टैबलेट बरामद हुईं। खरीद का रिकॉर्ड नहीं, MRP और एक्सपायरी भी मिटाई
जांच के दौरान अधिकारियों को दवा की खरीद से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आरोपी के पास इतनी मात्रा में ट्रामाडोल रखने की अनुमति भी नहीं थी। अधिकारियों के मुताबिक बरामद स्टॉक पर MRP, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर मिटाए गए थे, जिससे दवा के स्रोत और उसकी वैधता को लेकर भी संदेह गहरा गया। ड्रग कंट्रोल इंस्पेक्टर नवदीप सिंह संधू ने बताया कि विभाग की ओर से निर्धारित शर्तों के तहत कुछ अस्पतालों और उनके आसपास स्थित अधिकृत फार्मेसियों को ही ट्रामाडोल रखने और बेचने की अनुमति होती है। ऐसे में किसी सामान्य मेडिकल स्टोर से इतनी बड़ी मात्रा में बिना अनुमति ट्रामाडोल मिलना गंभीर मामला है। स्टोर का लाइसेंस था, ट्रामाडोल रखने की अनुमति नहीं
जांच अधिकारी ASI अजित कुमार ने बताया कि पवन कुमार के पास मेडिकल स्टोर चलाने का लाइसेंस था, लेकिन उसके पास ट्रामाडोल का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं थी। बरामद दवाओं को पुलिस ने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है। दूसरे व्यक्ति से दवा मिलने का दावा
पुलिस के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में पवन कुमार ने बताया कि एक व्यक्ति उसकी दुकान पर आता था और उसे ट्रामाडोल की गोलियां सप्लाई करता था। अब पुलिस उस व्यक्ति की पहचान करने के साथ ही यह पता लगाने में जुटी है कि 49 हजार गोलियों की सप्लाई कहां से हुई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।