Wednesday, 26 August 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · उत्तर प्रदेश

‘अवैध निर्माण हटाने होंगे’, लखनऊ में वकीलों के 72 अवैध चैंबर पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

INT News25 August 2026 at 03:45 pm

UP News : जिला अदालत परिसर के आसपास सार्वजनिक जमीन और रास्तों पर कथित अतिक्रमण कर बनाए गए वकीलों के चैंबर और अन्य निर्माणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. हाईकोर्ट ने करीब 72 कथित अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस देकर कब्जा हटाने या जमीन और निर्माण पर अपना वैध अधिकार साबित करने का मौका देने का निर्देश दिया था.

अवैध निर्माण को पद का सहारा नहीं

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ किया कि बार एसोसिएशन में किसी पद पर होना अनधिकृत निर्माण को बनाए रखने का अधिकार नहीं देता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्माण मुख्य सड़क या सार्वजनिक जगह पर है तो उसे जारी रखने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है. पीठ ने दो टूक कहा कि अवैध निर्माण को किसी भी आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है.

सड़क और ट्रैफिक बाधित होने पर नाराजगी

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि उन्होंने खुद इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायाधीश के तौर पर करीब दो साल काम किया है और वहां की स्थिति देखी है. उन्होंने कहा कि सड़क किनारे किए गए निर्माणों से रास्ते बाधित होते हैं और यातायात पर भी असर पड़ता है. पीठ का रुख था कि सार्वजनिक रास्तों और जमीन पर कब्जे को केवल इसलिए जारी नहीं रखा जा सकता क्योंकि वहां वकीलों के चैंबर बने हुए हैं.

वैकल्पिक जमीन और मध्यस्थता का सुझाव

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अग्रवाला ने प्रभावित वकीलों के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का सुझाव दिया. उन्होंने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने की संभावना भी रखी. हालांकि, पीठ ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. जस्टिस नाथ ने सवाल किया कि कथित सार्वजनिक अतिक्रमण के मामले में मध्यस्थता क्यों की जाए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बार एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी.

कोर्ट परिसर की सुरक्षा पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत परिसरों को अतिक्रमण से मुक्त रखने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया. जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस नाथ ने सवाल उठाया कि अगर कोर्ट परिसर के आसपास ही अतिक्रमण होने लगे तो उसकी सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा. जस्टिस नाथ ने अपने एक जिला अदालत के दौरे का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां जिला जज के लिए निर्धारित पार्किंग की जगह को एक वकील ने कथित तौर पर चैंबर में बदल दिया था. पीठ ने स्पष्ट संदेश दिया कि अदालत परिसर में अनधिकृत कब्जे को किसी पद या पेशे के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता.

Also Read: UPSSSC ANM Result रिजल्ट जारी, 10,272 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट, यहां देखें कटऑफ