Wednesday, 26 August 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · उत्तर प्रदेश

IAS दुर्गा शक्ति नागपाल और सिविल जज शबीना खान विवाद: हाईकोर्ट ने लिया कड़ा रुख

INT News25 August 2026 at 04:28 pm

UP News: देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल और गोंडा की सिविल जज शबीना खान के बीच तीन दशक पुराने भूमि विवाद को लेकर टकराव पैदा हो गया है. कमिश्नर पर आरोप है कि उन्होंने सिविल जज को फोन करके अनुचित दबाव बनाने और पद का दुरुपयोग करने का प्रयास किया. इस गंभीर मामले को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इसे प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना माना है और मुख्य न्यायाधीश से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने का आदेश दिया है.

तीन दशक पुराना नजूल भूमि का विवाद

यह पूरा मामला गोंडा शहर के 'ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगरपालिका परिषद' से जुड़ा है, जो साल 1997 से अदालत में लंबित है. यह विवाद एक कीमती सरकारी नजूल भूमि से संबंधित है, जिसका पट्टा निरस्त होने के बाद भी वहां निजी स्कूल संचालित हो रहा है. सिविल जज शबीना खान की अदालत में इस केस पर स्थगन आदेश प्रभावी था. इसी दौरान जज ने जिला जज को पत्र लिखकर कमिश्नर द्वारा अनुचित दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया.

फोन कॉल और बहस का पूरा घटनाक्रम

जज शबीना खान के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को उनके फोन पर पहली कॉल आई, जिसे उनके बेटे ने उठाया. फोन करने वाली महिला ने निजी जानकारी मांगी लेकिन नाम नहीं बताया. बाद में दोबारा फोन आने पर कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने बात की और छुट्टी व मुकदमे को लेकर सवाल पूछे. इसके बाद कमिश्नर के स्टेनो ने कोर्ट आकर संपर्क कराया. जज का आरोप है कि कमिश्नर ने उनके संस्कारों पर सवाल उठाए और शिकायत की धमकी दी.

मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल की तरफ से आधिकारिक सफाई पेश की गई. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सरकारी संपत्ति के संरक्षण और केस की पैरवी की जानकारी लेना था. फोन पर मुकदमे के गुण-दोष या किसी आदेश पर बात नहीं हुई थी. उन्होंने केवल जज के छुट्टी से लौटने की जानकारी ली थी. कमिश्नर कार्यालय ने कहा कि वे न्यायपालिका की गरिमा का पूरा सम्मान करती हैं और सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं.

हाईकोर्ट का सख्त रुख और कानूनी कार्रवाई

दोनों पक्षों की बातों का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने माना कि यह पूरा घटनाक्रम न्यायपालिका के स्वतंत्र कामकाज में प्रशासनिक हस्तक्षेप के समान है. हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आपराधिक अवमानना पीठ के पास भेजा जा रहा है. इस कानूनी प्रक्रिया के शुरू होने से आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती हैं.

Must Read: UP Election 2027: BSP Supremo का दांव, गठबंधन नहीं सिर्फ एकला चलो ! 3 राज्यों में अकेले चुनाव लड़ेगी मायावती