Wednesday, 26 August 2026
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शिक्षक पी रहे शुद्ध पानी, बच्चे बूंद-बूद को तरसे:कैंपर से पानी पीने गए तो मांगे 20 रुपए, अभिभावकों ने वायरल किया वीडियो

INT News25 August 2026 at 07:19 pm

प्रदेश में जहां स्कूलों के मुद्दों को लेकर लगातार अव्यवस्थाओं की बातें सामने आ रही हैं। वहीं अब कैथल के गांव बालू के सरकारी स्कूल का भी एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में बच्चों से पानी के कैंपर मंगवाने के लिए 20-20 रुपए मांगे जा रहे हैं। हालांकि मुद्दों को सीजेपी ने प्रदेश के झज्जर, चरखी दादरी और अन्य जिलों में जोरशोर से उठाया, लेकिन बाद में उनकी स्कूलों में एंट्री बंद कर दी गई। नियम बना कि गांव के सरपंच के साथ स्कूलों के व्यक्ति की एंट्री हो सकेगी। अब कैथल में स्कूल के छोटे बच्चों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि पीने के पानी के लिए उनसे 20-20 रुपए मांगे गए। बच्चों की इस शिकायत पर उनके अभिभावक स्कूल में पहुंचे और शिक्षकों की जमकर क्लास लगाई। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडिया शनिवार का है। पानी पीना है तो खुद कैंपर खरीदने होंगे वीडियो में बच्चों के अभिभावक स्कूल में पहुंचते हैं और शिक्षकों से बच्चों को पानी उपलब्धता के बारे में पूछते हैं। इस पर स्टाफ की ओर से कहा जाता है कि वे अपने लिए खुद 20-20 रुपए के पानी के कैंपर मंगवाते हैं। अगर बच्चों को इन कैंपर में से पानी पीना है तो उनको खुद 20 रुपए लेकर आने होंगे और कैंपर खरीदने होंगे। वीडियो में शिक्षक और अभिभावकों के बीच हो रही बातचीत शिक्षक- बच्चे ये बोले कि मास्टर तो कैंपर का पानी पीते हैं और हम टंकी का। हम अपनी जेब से पीते हैं। अभिभावक- चलो कोई बात नहीं, फर्क नहीं पड़ता। जब आप जेब से पैसे लगाकर पानी पी रहे हो तो इसे बंद करो। स्कूल को ताला लग जाएगा। शिक्षक- हम तो बच्चों के लिए व्यवस्था करने की सोचते हैं। अभिभावक- यही व्यवस्था है क्या मास्टर जी, कि 20-20 रुपए लेकर आओ। शिक्षक- नहीं ऐसा किसी ने नहीं कहा। हम तो ये कहते हैं कि बेटा हम तुम्हारे पैसे नहीं ले सकते। अगर लेंगे तो बाद में कहा जाएगा कि मास्टर पैसे ले गए। अभिभावक- सर ये पानी की समस्या कितने साल से है। आप बच्चों के लिए स्कूल में आते हो। शिक्षक- बच्चों से हमारा जोजगार जुड़ा हुआ है। ये बिल्कुल सच्चाई है। अभिभावक- दो साल पहले भी यही समस्या लेकर आए थे। टंकी चैक की हैं, ढक्कन टूटे पड़े हैं बुरा हाल है। हम बच्चों को विश्वास पर भेजते हैं। अगर बच्चा स्कूल में प्यासा होगा तो आपके ऊपर क्या बीतेगी। शिक्षक- हम भी बच्चों को प्यासे नहीं रहने देते। अभिभावक- ये बच्चे हमारे नहीं आपके हैं। हम आपके पास भेज देते हैं। इसके अलावा भी अन्य कई प्रकार की बातें होती हैं। शिक्षक तो शुद्ध पानी पी रहे और बच्चों को मिल रहा खराब पानी ग्रामीण अनिल कुमार, रोहताश, राममेहर, मनोज, राजेश व स्कूली बच्चों ने कहा कि बच्चों को प्यास लगी तो शिक्षकों ने कैंपरों से पानी पीने नहीं दिया। टंकी में पानी काफी खराब था, जिसे बच्चे पी नहीं सकते थे। बच्चे घर आकर बोले कि उनको पीने का पानी चाहिए। बच्चे कैंपर में पानी पीने गए तो कैंपर के लिए गए तो कहा गया कि खुद पैसे लेकर आओ। ऐसे में शिक्षक तो शुद्ध पानी पी रहे हैं और बच्चों को खराब पानी दिया जा रहा। अभिभावकों ने मांग की कि बच्चों के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था की जाए। परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि स्कूल में पीने के पानी समेत मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो वे बड़ा कदम उठा सकते हैं। कमेटी प्रधान बोले-स्टाफ अपने स्तर पर ले रहा निर्णय वहीं इस बारे में जब स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान सुनील कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल स्टाफ की ओर से उन्हें भी कई बार एसएमसी की मीटिंग में नहीं बुलाया जाता। काफी समय से स्कूल का स्टाफ अपने स्तर पर ही निर्णय लिए जा रहा है। अब बात बच्चों की सुविधाओं की है तो वे पीछे नहीं हटेंगे। बच्चों को स्कूल में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए अभिभावकों के साथ मिलकर हर तरह का प्रयास किया जाएगा। प्रिंसिपल बोले- टंकियों की नियमित सफाई हो रही स्कूल के प्रिंसिपल अखिलेश कुमार ने बताया कि यह शनिवार का मामला है। अभिभावक स्कूल में आए थे। टीचर सुभाष से उनकी बातचीत हुई तो अभिभावकों ने वीडियो बना ली। उन्होंने बताया कि पानी की सप्लाई गांव के ट्यूबवेल से आती है। उन्होंने बताया कि स्टाफ शुरूआत से ही पानी के कैंपर मंगवा रहा है। वहीं विद्यार्थियों ने जो वीडियो दिखाया है, वह दूसरे टैंक का है, जिसे पौधों में पानी देने और सफाई जैसे कार्यों में प्रयोग किया जाता है। पीने का पानी बिल्कुल साफ है। टंकियों की सफाई भी नियमित सफाई करवाई जा रही है। शिक्षा अधिकारी ने कहा- जांच करवाई जाएगी मामले को लेकर जब जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में विभाग के अधिकारियों से जांच करवाई जाएगी। अगर कहीं खामियां मिलती हैं तो उनको दूर किया जाएगा। बच्चों के स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं। पहले भी विवादों में रहा स्कूल बता दें कि ये वही स्कूल है, जहां वर्ष 2017 में स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कई बच्चों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार की ओर से स्कूल में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर हलफनामा भी दाखिल किया गया था। अब एक बार फिर स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।