समाचार · पंजाब
फाजिल्का में सरपंच यूनियन की सियासत गरमाई:विधायक ने कमेटी भंग कर 5 नए प्रधान बनाए, अध्यक्ष संदीप सिंह बोले- MLA टिकट दावेदारी के चलते दबाने की कोशिश
फाजिल्का विधानसभा हलके में साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर ही टिकट की दावेदारी को लेकर मचे अंदरूनी घमासान के बीच 'सरपंच यूनियन' को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। पिछले कुछ दिनों से 'आप' की टिकट पर अपनी दावेदारी ठोक रहे सरपंच यूनियन के अध्यक्ष संदीप सिंह को झटका देते हुए स्थानीय विधायक नरिंदरपाल सिंह सवना की मौजूदगी में पुरानी यूनियन को भंग कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब एक नया 5 सदस्यीय 'प्रधानों' का बोर्ड बना दिया गया है, जो पूरे हलके में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक प्रधान की जगह अब संभालेंगे 5 प्रधान, विधायक ने दी मंजूरी विधायक नरिंदरपाल सिंह सवना की अध्यक्षता में फाजिल्का हलके के सरपंचों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, जिसमें आधिकारिक तौर पर गांवों के विकास कार्यों और समस्याओं पर चर्चा होनी थी। लेकिन इस बैठक के बाद सरपंचों की आपसी सहमति का हवाला देते हुए पुरानी यूनियन को भंग करने का बड़ा फैसला ले लिया गया। नई सरपंच यूनियन में अब एक कमान के बजाय पांच प्रधान नियुक्त किए गए हैं। इस 5 सदस्यीय कमेटी में सरपंच गुरमीत सिंह, सरपंच सुमन सिंह, सरपंच सुरिंदर कंबोज, सरपंच सुरिंदर आहूजा और पूर्व प्रधान संदीप सिंह को शामिल किया गया है। विधायक नरिंदरपाल सिंह सवना ने इस फैसले का स्वागत करते हुए नवनियुक्त पांचों प्रधानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरपंचों ने आपसी रजामंदी से इस कमेटी का गठन किया है, जिससे हलके के विकास कार्यों को और गति मिलेगी।
"2027 की टिकट मांग रहा हूँ, इसलिए विधायक मुझे दबाना चाहते हैं" उधर, सरपंच यूनियन के पूर्व अध्यक्ष और अब इस 5 सदस्यीय कमेटी के हिस्से बने संदीप सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सीधे विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है उन्होंने खुलकर कहा कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए फाजिल्का सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) की टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वह लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं और पार्टी हाईकमान से भी मिल चुके हैं। बिना चुनाव लिए फैसला, कमेटी असंवैधानिक इसी दावेदारी से घबराकर स्थानीय विधायक उन्हें राजनीतिक रूप से 'जीरो' करने की कोशिश कर रहे हैं और सरपंचों को अपने इशारों पर चलाना चाहते हैं। संदीप सिंह ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि संदीप सिंह ने तर्क दिया कि वह बाकायदा लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतकर सरपंच यूनियन के अध्यक्ष बने थे, लेकिन अब बिना कोई चुनाव करवाए अपनी मर्जी से पुरानी यूनियन को भंग कर दिया गया। दे सकते हैं इस्तीफा, धड़ेबंदी रोकने के लिए हुए शामिल संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि वे यूनियन के भीतर किसी भी तरह की धड़ेबंदी या फूट नहीं चाहते थे, जिसके चलते उनके साथियों की सलाह पर उन्होंने इस 5 सदस्यीय कमेटी में रहना स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे आने वाले समय के राजनीतिक हालातों को देखते हुए इस नए पद से इस्तीफा देने का फैसला भी कर सकते हैं। फिलहाल, वे हलके में अपनी चुनावी तैयारियों और दौरों में जुटे हुए हैं।