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मलेरकोटला में पीएमश्री स्कूलों की समीक्षा:प्रभारी सचिव राहुल भंडारी ने शैक्षणिक गतिविधियों और सुविधाओं का जायजा लिया
मलेरकोटला जिले के प्रभारी सचिव एवं प्रमुख सचिव (पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन) राहुल भंडारी (IAS) ने हाल ही में जिले के 'पीएम श्री' (PM SHRI) स्कूलों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इन स्कूलों में शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियों, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं का धरातल पर जायजा लिया। इस संबंध में प्रमुख सचिव राहुल भंडारी की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के मीटिंग हॉल में एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से डीसी विराज एस. तिड़के अतिरिक्त उपायुक्त राजदीप सिंह बराड़, तरविंदर कौर (जिला शिक्षा अधिकारी - सेकेंडरी) के अलावा जिले के पीएम श्री स्कूलों के स्कूल प्रमुख (प्रिंसिपल्स) और शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे। बैठक के दौरान प्रभारी सचिव ने स्कूल प्रमुखों से आमने-सामने संवाद कर छात्रों के लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक और सहायक सुविधाओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। लैब, लाइब्रेरी और मिड-डे मील का हुआ मूल्यांकन लैब और तकनीक: विज्ञान, कंप्यूटर और स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) लैब की कार्यप्रणाली। छात्र कल्याण: मिड-डे मील की गुणवत्ता, लाइब्रेरी में पुस्तकों की उपलब्धता और करियर गाइडेंस (Career Guidance) कार्यक्रम। बुनियादी ढांचा: स्कूल भवनों की स्थिति और छात्रों के लिए आवश्यक बुनियादी आवश्यकताएं। कमियों को दूर करने के लिए तुरंत मुख्यालय भेजे जाएं प्रस्ताव प्रभारी सचिव राहुल भंडारी ने शिक्षा अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि यदि किसी भी पीएम श्री स्कूल में किसी सुविधा, आधुनिक उपकरण या बुनियादी ढांचे की कमी है, तो उसका विस्तृत और तथ्यात्मक प्रस्ताव (Proposal) तुरंत तैयार कर मुख्यालय भेजा जाए। प्रमुख सचिव का मुख्य निर्देश छात्रों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और कौशल-उन्मुख (Skill-oriented) शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूलों की हर जरूरत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए। इसमें किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" वैज्ञानिक सोच और आत्मविश्वास पैदा करना मुख्य लक्ष्य राहुल भंडारी ने पीएम योजना के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन स्कूलों का मुख्य लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों को एक ऐसा बेहतर शैक्षणिक माहौल प्रदान करना है जिससे उनमें वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, कौशल, आत्मविश्वास और व्यावहारिक समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित हो सके। उन्होंने स्कूल प्रमुखों से आग्रह किया कि वे छात्र-केंद्रित गतिविधियों को बढ़ावा दें और सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना सुनिश्चित करें।