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नानकसर में बाबा नंद सिंह जी की 83वीं बरसी शुरू:पहले दिन पूर्व उपमुख्यमंत्री रंधावा और पूर्व मंत्री आशू ने हाजिरी लगाई
शिरोमणि संप्रदाय नानकसर कलेरां के बानी, महान तपस्वी धन-धन बाबा नंद सिंह जी कलेरां वाले का 83वां सालाना बरसी महासमागम पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। देश-विदेश से उमड़ रही संगत के बीच समागम के पहले दिन पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने मुख्य रूप से हाजिरी लगाई। इस दौरान उन्होंने गुरु घर की मर्यादा के तहत शीश नवाया और ठाठ नानकसर के मौजूद महापुरुषों—संत बाबा गुरजीत सिंह जी और संत बाबा घाला सिंह जी से मुलाकात कर उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। "पवित्र स्थान पर राजनीति नहीं, केवल आत्मिक शांति की चाह" धार्मिक स्थल पर शीश नवाने पहुँचे दोनों वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि नानकसर जैसे महान और त्रिलोकी पावन स्थल पर वे किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं आए हैं। यह भक्ति, सिमरन और पूर्ण वैराग्य की धरती है। यहाँ किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं की जाएगी। हम यहाँ पूरी तरह से एक आम श्रद्धालु के रूप में केवल बाबा जी के चरणों में माथा टेकने और महापुरुषों का ओट-आशरा लेने उपस्थित हुए हैं।" बाणी और सिमरन से लाखों को जोड़ने वाले महापुरुष सुखजिंदर सिंह रंधावा और भारत भूषण आशू ने बाबा नंद सिंह जी के महान आध्यात्मिक जीवन को याद करते हुए कहा कि उनके तप और वचनों ने दुनिया भर में लाखों भटकी हुई रूहों को गुरबाणी और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लड़ लगाया। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भक्ति स्थल पर आकर और संतों के दर्शन करने मात्र से ही मन को एक असीम आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। आज भी यहाँ बिना किसी चढ़ावे (माया) के, केवल नाम-सिमरन की जो रीत बाबा जी ने शुरू की थी, वह पूरी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक है। महापुरुषों ने किया कांग्रेस नेताओं का सम्मान महासमागम में हाजिरी लगाने पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं सुखजिंदर सिंह रंधावा, भारत भूषण आशू और सुखविंदर सिंह सिद्धू को धार्मिक क्षेत्र में उनकी आस्था और सम्मान स्वरूप संत बाबा गुरजीत सिंह जी और संत बाबा घाला सिंह जी द्वारा गुरु घर की बख्शिश (सिरोपाओ और स्मृति चिह्न) देकर सम्मानित किया गया। इस धार्मिक समागम के गरिमामयी अवसर पर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष भजन सिंह सवद्दी, मनी गर्ग (अध्यक्ष), सुखदेव सिंह तूर (चेयरमैन), सरपंच जगजीत सिंह काउंके, संजीव चौधरी, जगदीप सिंह काउंके और सरपंच दीपा गुरुसर सहित इलाके की कई धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक शख्सियतें तथा भारी संख्या में साध-संगत उपस्थित थी।