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35 साल पहले लापता हुआ था सिपाही, नौकरी मांगने वाराणसी से नैनीताल पहुंची पत्नी; क्या हुआ था

35 साल पहले मेरे पति नैनीताल थाने में सिपाही के पद पर थे। एक दिन एसपी साहब ने उन्हें डांटा और सस्पेंड कर दिया। इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चल पाया। मानसिक हालत ठीक नहीं होने के कारण इतने साल मुझे अपने मायके में इलाज कराना पड़ा। मुझे पति की बची नौकरी का सेवा लाभ दिलवा दीजिए साहब... ये बातें वाराणसी के कैथी गांव से आई महिला ने नैनीताल एसपी से कही।दरअसल, वाराणसी से एक महिला अपनी बेटी के साथ हल्द्वानी पहुंची और खुद को 35 साल से लापता सिपाही की पत्नी बताया। महिला ने एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल से मुलाकात कर कहा कि उनके पति नैनीताल पुलिस में तैनात थे, जिनका 1991 के बाद से कुछ पता नहीं चल सका है। अपनी बदहाल आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए एसपी से अपने पति के बचे सेवाकाल का लाभ दिलाने की अपील की।1991 में क्या हुआ था, सब बतायापुलिस बहुउद्देशीय भवन पहुंचीं आशा देवी ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले की चौबेपुर तहसील के कैथी गांव की रहने वाली हैं। उनके पति सुदर्शन सिंह वर्ष 1988 से 1989 तक जीआरपी में तैनात रहे। उस समय उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा था। इसके बाद उनका तबादला सिविल पुलिस में हो गया और उन्हें नैनीताल जिले में सिपाही के तौर पर तैनाती मिली। लेकिन वर्ष 1991 में तत्कालीन एसएसपी नैनीताल ने उन्हें किसी गलती के चलते निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद से पति मानसिक तनाव में आ गए और कुछ समय बाद अचानक लापता हो गए। पति के अचानक यूं चले जाने के सदमे ने आशा और उसकी इकलौती बेटी को भी मानसिक तनाव का शिकार बना दिया। कई वर्षों तक उसके मायके पक्ष के लोग इलाज कराते रहे। आज इतने साल बीत जाने के बाद भी पति सुदर्शन सिंह का कुछ पता नहीं चल सका है।पति की नौकरी से जुड़े दस्तावेज नहीं: एसपीआशा देवी ने एसपी को बताया, उनके पास पति की नौकरी से जुड़े मूल दस्तावेज नहीं हैं। जिससे उनकी पहचान पुख्ता हो सके। इसलिए पुलिस ने जांच के लिए अब मुख्यालय को पत्र लिखा है। कहा कि उनके पति के पुलिस विभाग में बचे कार्यकाल का जो भी लाभ बनता है, वह दिलाया जाए ताकि उनकी जिंदगी की यह आखिरी कटीली राहें कुछ आसान हो सकें।मानसिक रूप से ठीक हुई तो पुलिस के पास पहुंचीआशा देवी ने बताया, जब उनका और बेटी का मानसिक स्वास्थ्य ठीक हुआ तो न्याय की उम्मीद लेकर पुलिस के पास पहुंची। वर्तमान में वह आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। बेटी की शादी अन्य खर्चों को चलाना भी बहुत मुश्किल हो गया है। उधर, एसपी सिटी ने कहा कि महिला अपनी बेटी के साथ आई थी। अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। पहले ये जांच की जा रही है कि इस नाम के व्यक्ति सिपाही थे या नहीं। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।संदिग्धों की जानकारी पुलिस का दें: एसएसपीहल्द्वानी। नैनीताल जिले में अपराध पर अंकुश लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिले के सभी पुलिस अधिकारियों को शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को मीडिया से बात करते हुए एसएसपी ने कहा है कि बिना सत्यापन के मकानों में किराएदार या दुकानों में काम पर लोगों को रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा कि यदि कहीं भी संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस, उनके कार्यालय को दी जाए।