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Richa Chadha:अभिनेत्री ने कहा इस डर से बेटी की तस्वीर सोशल मीडिया पर नहीं की पोस्ट

INT News28 September 2026 at 10:57 pm

richa chadha :अभिनेत्री और निर्मात्री ऋचा चड्ढा ने हाल ही में यूट्यूब पर प्रसारित हुए शो ‘मुसाफिरी’ के साथ नॉन-फिक्शन शोज में अपनी नयी शुरुआत की है.उनके इस नये शो और करियर पर उर्मिला कोरी के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

दो साल की बच्ची की मां और ‘मुसाफिरी’ की शूटिंग, किस तरह के अनुभव रहे?

मुश्किल था. टाइम मिलता नहीं था कुछ भी करने का. मैं सुबह उठकर 4-5 बजे एपिसोड लिख लेती थी. जिस कमरे में हम सोते हैं, उसी में मेरा क्लॉजेट भी है. उसी में बेबी भी सोती है.शूट के लिए कपड़े निकालने होते थे, तो मैं अंधेरे में टॉर्च जलाकर कपड़े निकालती थी, ताकि लाइट या आवाज से उसकी नींद न खुले और वह रोने न लगे. आप ‘मुसाफिरी’ के कुछ एपिसोड्स में मेरे कपड़े देखकर ही समझ जायेंगी कि मैंने बस जो मिला, वही पहन लिया है.

‘मुसाफिरी’ मुंबई के बाद क्या दूसरे राज्यों में भी पहुंचेगी, खासकर बिहार और झारखंड?

हां, सभी को पता है कि मैं आधी बिहारी हूं. बिहार को मैं एक अलग तरह से एक्सप्लोर करने की सोच रही हूं. अंग्रेजों के राज की वजह से बिहार गरीबी में पहुंचा है. कोलोनियलिज्म ने बिहार को किस तरह प्रभावित किया, मैं इस बात को ‘मुसाफिरी’ में लाना चाहूंगी. इसके साथ ही बिहार की भूमि बौद्ध,जैन,सिख समुदायों के लिए किस तरह से पूजनीय है. यह भी बहुत ख़ास पहलू है.

आप फिल्मों की शूटिंग को कितना मिस करती हैं?

मैं मिस करती हूं लेकिन अच्छा काम करना चाहती हूं . जब मुझे अच्छी स्क्रिप्ट मिलती है, तभी फिल्म करती हूं. जो लोग मां हैं, वे मेरी बात से सहमत होंगी कि अपने बच्चे को छोड़कर हर दिन 12 घंटे की शिफ्ट करने का मन नहीं होता, जब तक कि स्क्रिप्ट खास न हो. मैंने और अली ने साथ में एक फिल्म की शूटिंग दिल्ली में शुरू की है. शशि वर्मा उसके निर्देशक हैं. यह मिडिल क्लास वाली कहानी है. हमारी बेटी हमारे साथ दिल्ली में रहेगी. इस दौरान मुंबई में अपनी बिल्ली को मैं एक दोस्त के पास रख आयी हूं.

अली कमाल के अभिनेता हैं उन्होंने लगातार साबित किया है, वे पिता कैसे हैं ?

वो बेस्ट फादर है. मैं उस पर अपनी बेटी छोड़कर कहीं भी जा सकती हूँ. मैं बताना चाहूंगी कि मैंने पहली बार अपनी बेटी का डायपर आठ महीने की जब वो हुई थी तब बदला था. इससे आप समझ सकती हैं कि अली कितना हैंड्स ऑन फादर रहा है कि उसने आठ महीने तक बेबी का डायपर खुद ही बदला था.

मदरहुड के बाद एक्ट्रेसेज के वजन पर काफी कुछ कहा जा रहा है. आपका क्या कहेंगी?

पहले तो ट्रोल्स को मैं बहुत प्यार करती हूं. वे मुझे इतनी एनर्जी देते हैं. मुझे लगता है कि वे अपनी जिंदगी की तकलीफों के बारे में बताते हैं, क्योंकि जो बोल रहा होता है, उसका स्टेट ऑफ माइंड पता चल जाता है ना. उसको क्या पड़ी है कि किसका क्या साइज है? तुम्हारी रोटी कोई थोड़ी खा रहा है. तो जो आदमी हमारी बॉडी में इतना इंवेस्टेड है, उसको तो आप थैंक यू ही बोल सकते हैं ना, इसलिए मैं ट्रोलर्स को सीरियसली नहीं लेती.हर छह महीने में बॉडी के पूरे सेल अंदर से बाहर तक रिन्यू होते हैं. तो जो आज मोटा है, वह कल पतला हो सकता है और जो आज पतला है, वह कल बहुत मोटा भी हो सकता है. यही साइंस है. वैसे हमें यह नजरिया रखने की जरूरत है कि हर कोई, हर साइज में सुंदर है.

आपने सोशल मीडिया पर अभी तक अपनी बेटी की तस्वीर साझा नहीं की है. कोई खास वजह?

मन नहीं करता है फोटो डालने का सच कहूं तो मुझे डर लगता है. मैं मां हूं, तो मेरे दिमाग में आता है कि कुछ भी गलत इस्तेमाल हो सकता है. आजकल बच्चों की लोग फोटो मोर्फ कर देते हैं और कहीं भी इस्तेमाल कर लेते हैं. कलयुग है. कुछ भी कहा नहीं जा सकता. लुक के बारे में मैं यही कहूंगी कि वह अली पर गयी है, लेकिन शरारती वह मेरी तरह है.

इस सीरीज की शूटिंग के दौरान मुंबई के शुरुआती दिनों और उससे जुड़ा संघर्ष भी याद आया?

हां, मैं कंट्री क्लब के पास रहती थी. हर बारिश में पूरा इलाका डूब जाता था. बारिश में बहुत मुश्किल होती थी. ऑटो बहुत मुश्किल से मिलता था, तो निकलते हुए सोचते थे कि इतने रुपये ही खर्च करने हैं. एक्ट्रेस बनना था, तो फ्रूट भी खाना था, इसलिए ऐसा फ्रूट स्टॉल ढूंढा, जहां सस्ते में फ्रूट सलाद मिलता था. तो वहीं खा लेती थी. यह सब संघर्ष था, लेकिन मैंने उसे एंजॉय किया. शाहरुख खान के बंगले ‘मन्नत’ के बाहर भी जाती थी और कहती थी, “एक दिन तुम मुझे पहचानोगे, मेरे नाम से बुलाओगे.” ये सब बोलकर मैं बहुत खुश हो जाती थी.

करियर के इस मुकाम पर पीछे मुड़कर देखती हैं तो आपके लिए क्या रिग्रेट और रिवॉर्ड रहा है ?

बिलकुल शुरुआत में मैंने एक फिल्म की थी.जिसकी वजह से मुझे चोट लग गयी थी. पैसे भी नहीं मिले थे. फिल्म भी नहीं चली थी लेकिन उस वक़्त मैं 24 साल की थी. मुझे लगता है कि लड़कियों को मैच्योरिटी 30 के बाद ही आती है. वरना हमने भी सुना था। ऐसे कपडे क्यों पहनती हो. ये सर्जरी करवा लो. रिवॉर्ड की बात करें तो भोली पंजाबन के किरदार ने मुझे ऑफ स्क्रीन स्ट्रांग भी बनाया था और कमर्शियल सक्सेस तो दिया ही था.

आनेवाले प्रोजेक्ट्स

लेखक के तौर पर दो कहानियां लिख रही हूं. आखिरी सोमवार पूरी कर ली है एक और कहानी पर काम चल रहा है.