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गैंगस्टर अखिलेश सिंह को हाईकोर्ट से राहत, आर्म्स एक्ट केस में बरी करने का फैसला बरकरार

INT News24 October 2026 at 10:53 pm

रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने जमशेदपुर के अखिलेश सिंह को आर्म्स एक्ट के मामले में बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर एक्विटल अपील में मेरिट नहीं पाते हुए उसे खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि आरोपी की कथित स्वीकारोक्ति साबित नहीं हुई और जिस परिसर से हथियार बरामद किया गया था, उस पर आरोपी का नियंत्रण भी स्थापित नहीं हो सका. ऐसे में बरामदगी को आरोपी के खिलाफ विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना जा सकता.

यह मामला सिदगोड़ा थाना कांड संख्या 86/2004 से संबंधित है. जमशेदपुर के 12वें अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 12 अगस्त 2021 को साक्ष्यों के अभाव में अखिलेश सिंह को बरी कर दिया था. राज्य सरकार ने इस फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी.

क्वार्टर से पिस्टल और 12 कारतूस बरामद करने का दावा

पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार, नौ अक्तूबर 2004 की रात पुलिस ने अखिलेश सिंह की कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के क्वार्टर संख्या 59 में छापेमारी की थी. पुलिस का दावा था कि क्वार्टर का ताला तोड़कर तलाशी लेने पर बेडरूम की रैक से प्लास्टिक में लिपटी नौ एमएम की पिस्टल मिली थी. पिस्टल की मैगजीन में 12 कारतूस थे. पुलिस ने हथियार और कारतूस जब्त कर जब्ती सूची तैयार की थी.

पांच पुलिसकर्मियों ने दी थी गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किये थे. सभी गवाह पुलिसकर्मी और छापेमारी दल के सदस्य थे. उन्होंने तलाशी और हथियार बरामदगी के संबंध में गवाही दी थी. राज्य सरकार ने हाइकोर्ट में दलील दी कि आरोपी की स्वीकारोक्ति के आधार पर हथियार बरामद हुए थे.

हालांकि, हाइकोर्ट ने रिकॉर्ड की समीक्षा में पाया कि कथित स्वीकारोक्ति प्रमाणित नहीं हुई और परिसर पर आरोपी का नियंत्रण भी साबित नहीं हुआ. अदालत ने अपील दायर करने की अनुमति मांगने संबंधी आवेदन के साथ विलंब माफी का आवेदन भी खारिज कर दिया. इसके साथ ही अखिलेश सिंह को बरी करने का निचली अदालत का फैसला कायम रहा.