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मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना होगा विधवा पेंशन का नाम; उत्तराखंड में राजस्थान जैसा मॉडल

सतीश जोशी ‘सत्तू’, चम्पावतMukhyamantri Ekal Nari Pension Yojana: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित की जाने वाली सामाजिक विधवा पेंशन योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है। राज्य के समाज कल्याण मंत्री खजान दास के अनुसार राजस्थान के अध्ययन दौरे से लौटने के बाद इस योजना का नाम बदलकर ‘मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना’ करने की तैयारी चल रही है। इस बदलाव का उद्देश्य योजना को अधिक समावेशी, व्यापक और सम्मानजनक पहचान देना है।समाज कल्याण मंत्री का कहना है कि विधवा शब्द सामाजिक दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता। महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देने के उद्देश्य से राजस्थान में पेंशन योजना को एकल नारी पेंशन नाम दिया गया है। इसी मॉडल को उत्तराखंड में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।उत्तराखंड में लागू होगा राजस्थान मॉडलसेवा संकल्प अभियान के तहत चम्पावत जिला मुख्यालय पहुंचे समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने बताया कि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर राजस्थान का अध्ययन दौरा किया था। वहां विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक और प्रस्तुतीकरण में उन्होंने उत्तराखंड में भी पेंशन योजना का नाम बदलने का अनुरोध किया। जिसे मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान करते हुए आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित कर इसे मंजूरी प्रदान करने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य एकल महिलाओं को सम्मानजनक पहचान देने के साथ उन्हें आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।कैबिनेट मंत्री खजान दास का कहना है कि विधवा पेंशन योजना का नाम बदलने के साथ ही सरकार इसके क्रियान्वयन की व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी में है। शासन से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नए नाम के साथ यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी।क्या है विधवा पेंशन योजनाइस योजना के तहत उन विधवाओं को मासिक पेंशन प्रदान की जाती है जिनकी पारिवारिक मासिक आय ₹4000 तक है या जो बीपीएल श्रेणी में आती हैं और किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ नहीं उठा रही हैं। पात्र लाभार्थियों को प्रति माह 1500 रुपये की पेंशन प्रदान की जाती है। इसकी योग्यता की बात करें तो आवेदक उत्तराखंड का निवासी होना चाहिए। आवेदक विधवा होनी चाहिए। विधवा की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। विधवा के परिवार की मासिक आय 4000 से अधिक नहीं होनी चाहिए, या उनके पास बीपीएल का वैध प्रमाण पत्र होना चाहिए। विधवा को किसी अन्य प्रकार की पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा होना चाहिए।चम्पावत में 7846 महिलाओं को मिलती है विधवा पेंशनजिले में वर्तमान में समाज कल्याण विभाग की ओर से 7846 विधवा महिलाओं को सामाजिक पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। जो जल्द ही एकल नारी सम्मान पेंशन योजना में तब्दील हो जाएगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत के अनुसार विभाग की ओर से जिले में वृद्धावस्था, दिव्यांग, किसान, बौना, तीलू रौतेली सहित विभिन्न प्रकार की सामाजिक पेंशनों के माध्यम से 30 हजार से अधिक लाभार्थियों को सामाजिक पेंशन का भुगतान किया जा रहा है।