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करनाल में हुई SKM की मीटिंग:टिकैत बोले- दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे बच्चों को किसान मोर्चा देगा सुरक्षा, गुंडागर्दी का देंगे जवाब,26 नवंबर को NCR में किया प्रदर्शन का
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में उतरने का ऐलान किया है। करनाल के जाट भवन में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की बैठक में शामिल होने पहुंचे टिकैत ने कहा कि प्रदर्शन करना सबका अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारी बच्चों और लड़कियों के साथ मारपीट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसान मोर्चा इन युवाओं को पूरा समर्थन देगा और उनकी सुरक्षा के लिए अपने लोगों को भी वहां भेजेगा। टिकैत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग पुलिस के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ मारपीट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 14 साल की लड़कियों तक के साथ मारपीट की जा रही है। यह गुंडागर्दी है और इसका मुकाबला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के युवा कार्यकर्ता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में शामिल होंगे। हालांकि, कानून हाथ में लेने के बजाय विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। 23 अक्टूबर को ज्ञापन, 26 नवंबर को NCR में प्रदर्शन
टिकैत ने बताया कि SKM की बैठक में देशभर में चल रहे किसान और भूमि अधिग्रहण से जुड़े आंदोलनों को समर्थन देने का फैसला लिया गया है। बिहार में भूमि बचाओ आंदोलन हो या उत्तर प्रदेश में सड़क और उद्योगों के नाम पर जमीन अधिग्रहण का मामला, किसान संगठन इन मुद्दों पर आंदोलन कर रहे लोगों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन और किसान संगठनों के मुद्दों को लेकर जिला स्तर पर डीएम और तहसील अधिकारियों को ज्ञापन दिए जाएंगे। इसके बाद 26 नवंबर को NCR क्षेत्र में प्रदर्शन किया जाएगा। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय मुद्दों के आधार पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। टिकैत ने कहा कि अब यह समझ में आ गया है कि आंदोलन के बिना लोगों के मुद्दे हल नहीं होंगे। इसलिए जहां भी किसानों और आम लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठेंगे, वहां संगठन अपनी आवाज बुलंद करेंगे। बोले- सरकार नहीं चाहती कि किसान खेती में टिके रहें
धान खरीद को लेकर टिकैत ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों को खेती में नुकसान हो रहा है। इसका असर यह है कि युवा खेती छोड़कर शहरों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं और बड़े उद्योगपतियों के लिए जमीन खरीदने का रास्ता आसान हो रहा है। टिकैत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में किसानों के हितों के बजाय बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में धान कम कीमत पर खरीदा जाता है और वही धान हरियाणा की बड़ी मिलों तक पहुंचता है। इससे बिहार और हरियाणा, दोनों जगह के किसानों को नुकसान होता है, जबकि व्यापारियों को फायदा मिलता है। उन्होंने कहा कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होगा। धान खरीद को लेकर पहले भी कई प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिली है। टिकैत का आरोप- रात में यूपी के धान की ट्रॉलियां पास कराने के लिए वसूली
धान खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए टिकैत ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से धान की ट्रॉलियां रात के समय हरियाणा में आती हैं और उन्हें पास कराने के लिए 2 हजार से 5 हजार रुपये तक दिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि दिन में पाबंदियां रहती हैं, जबकि रात में ट्रॉलियां निकल जाती हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पहले हरियाणा की मंडियों में उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के किसान भी अपनी फसल बेचने आते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि हरियाणा का किसान भी अपनी फसल बेचने के लिए परेशान है। धान और बाजरे की खरीद में आ रही दिक्कतों के कारण मंडियों में फसल के ढेर लगे हैं। टिकैत ने कहा कि सरकार ने खरीद के लिए इतनी शर्तें लगा दी हैं कि किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी हो रही है। बारिश के कारण मंडियों में पड़ी फसल खराब होने का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि सरकार खरीद के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को राहत नहीं मिल रही। हरियाणा में एक ही फसल पर निर्भरता बढ़ी, चीनी मिलों की क्षमता बढ़ाने की मांग
टिकैत ने कहा कि हरियाणा में खेती धीरे-धीरे धान और गेहूं तक सीमित होती जा रही है। प्रदेश में गन्ने की खेती और चीनी मिलों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि किसानों के पास फसल के विकल्प हों और उन्हें एक ही फसल पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ने की बड़ी बेल्ट होने के कारण किसानों के पास धान के अलावा भी विकल्प हैं, जबकि हरियाणा के किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे किसानों को फसल का उचित मूल्य मिले और मंडियों में उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए भटकना न पड़े। बोले- प्रदर्शन के लिए जगह तय करने से आंदोलन नहीं रुकेंगे
दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जगह निर्धारित किए जाने के सवाल पर टिकैत ने कहा कि सरकार ने पहले इंडिया गेट, लाल किले और अन्य स्थानों से प्रदर्शन हटाए। अब अगर रामलीला मैदान जैसी जगह निर्धारित की गई है, तो वहां प्रदर्शन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वालों के लिए जगह सीमित करने से आंदोलन नहीं रुकते। कोई व्यक्ति अपने खेत या घर के बाहर बैठकर भी अपनी मांग उठा सकता है। प्रदर्शन करना सबका अधिकार है और सभी के लिए समान नियम होने चाहिए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग से जुड़े सवाल पर टिकैत ने कहा कि केवल इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि खराब व्यवस्था को सुधारना जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। बैठक में देशभर में चल रहे किसान आंदोलनों, भूमि अधिग्रहण, धान खरीद, MSP की कानूनी गारंटी और प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। किसान संगठनों ने आने वाले दिनों में जिला और संभाग स्तर पर आंदोलन तेज करने की रणनीति तैयार की।