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'स्कूल की टीसी और आधार कार्ड उम्र तय करने का अंतिम सबूत नहीं', बालिग युवती के हक में हाई कोर्ट का फैसला

INT News24 October 2026 at 12:56 pm

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी वयस्क व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का मौलिक अधिकार है. इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने संत रविदास नगर की एक युवती की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे अपने पति के साथ जाने की अनुमति दे दी. युवती नारी निकेतन में रह रही थी.

पति के साथ रहने की जताई इच्छा

सुनवाई के दौरान युवती अदालत में उपस्थित हुई और उसने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है. उसने माता-पिता के साथ रहने से भी इनकार किया और नारी निकेतन में रहने की इच्छा नहीं जताई. युवती के पिता ने अदालत में दावा किया था कि उनकी बेटी नाबालिग है. इस दावे के आधार पर युवती की उम्र को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद हाई कोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर उसकी आयु पर विचार किया.

स्कूल के प्रमाणपत्र को उम्र का निर्णायक आधार नहीं माना

युवती के पिता ने उसके नाबालिग होने के दावे के समर्थन में स्कूल का स्थानांतरण प्रमाणपत्र पेश किया था. इस दस्तावेज में युवती की जन्मतिथि 24 मई 2009 दर्ज थी. हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि यह प्रमाणपत्र किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को उम्र निर्धारित करने के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता. इस तरह युवती की उम्र का निर्धारण प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम रूप से नहीं किया गया.

अस्थि परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर वयस्क मानी गई युवती

अदालत ने अस्थि परीक्षण रिपोर्ट पर विचार करते हुए युवती की उम्र 19 से 21 वर्ष के बीच मानी. इस आकलन के आधार पर उसे वयस्क मानते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि वह अपनी इच्छा के अनुसार रहने का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है. अदालत की टिप्पणी का मुख्य आधार यह था कि किसी बालिग व्यक्ति को अपनी जिंदगी और साथ रहने वाले व्यक्ति के बारे में निर्णय लेने का अधिकार है. इसी आधार पर खंडपीठ ने युवती को अपने पति के साथ जाने की अनुमति प्रदान की.

माता-पिता से भी मिलने की जताई उम्मीद

हाई कोर्ट ने युवती की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए उसे पति के साथ जाने की अनुमति दी. साथ ही अदालत ने उम्मीद जताई कि युवती अपने माता-पिता से भी मुलाकात करेगी. मामले में युवती की ओर से अदालत के सामने अपनी इच्छा स्पष्ट किए जाने और उम्र संबंधी रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया. अदालत की टिप्पणी वयस्क व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिकार को रेखांकित करती है.

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