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27 अक्टूबर से महाकाल की संध्या आरती आधे घंटे पहले:दद्योदक और भोग आरती 30 मिनट देरी से होगी; होली तक यही व्यवस्था
मौसम में बदलाव के चलते भगवान महाकालेश्वर की तीन आरतियों का समय मंगलवार (27 अक्टूबर) से बदला जा रहा है। दद्योदक और भोग आरती आधे घंटे देरी से, जबकि संध्या आरती आधे घंटे पहले होगी। भस्म आरती और शयन आरती के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई व्यवस्था होली तक लागू रहेगी। मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि परंपरा के अनुसार ठंड शुरू होने पर कार्तिक माह और गर्मी की शुरुआत में फाल्गुन माह के दौरान भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव किया जाता है। इसी के तहत आरतियों के समय के साथ भगवान को स्नान कराने की प्रक्रिया भी बदलती है। रूप चौदस से भगवान को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू होती है। शरद पूर्णिमा पर लगेगा केसरिया मीठे दूध का भोग मंदिर में 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस अवसर पर संध्या आरती में भगवान महाकाल को केसरिया मीठे दूध का भोग लगाया जाएगा। पुजारी महेश पुजारी के अनुसार, शरद पूर्णिमा से सर्दी का आगमन माना जाता है। इस बार पूर्णिमा की तिथि पर मतांतर के कारण आरतियों का समय 27 अक्टूबर से बदला जा रहा है। रूप चौदस से गर्म जल से स्नान करेंगे बाबा महाकाल रूप चौदस पर तड़के होने वाली भस्म आरती से भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू होगी। इस अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को गर्म जल से स्नान कराकर सुगंधित उबटन लगाएंगी। यह परंपरा फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली तक चलेगी। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे शुरू होकर 27 अक्टूबर 2026 को सुबह 7:01 बजे तक रहेगी। इसी अवधि के आधार पर 27 अक्टूबर से आरतियों का समय बदला जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… महाकाल मंदिर की संपत्ति पहली बार आई सामने उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति हर वर्ष श्रद्धालुओं से प्राप्त नकद और ऑनलाइन दान का ब्यौरा सार्वजनिक करती रही है, लेकिन पहली बार स्थायी संपत्तियों की तस्वीर सामने आई है। पढ़ें पूरी खबर…