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झारखंड हाइकोर्ट से कशिश डेवलपर्स को झटका, 725 करोड़ के DHFL कर्ज मामले में याचिका खारिज

रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने कशिश डेवलपर्स की ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर फैसला सुनाया. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कंपनी की याचिका खारिज कर दी. मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (एमसीए) की ओर से शुरू करायी गयी जांच को निरस्त करने की मांग भी खारिज कर दी गयी.
डीएचएफएल से कर्ज लेने में गलत ब्योरे का मामला
प्रार्थी कंपनी ने दिल्ली हाइकोर्ट में आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज प्राथमिकी निरस्त होने के बावजूद एमसीए की ओर से जांच कराये जाने को चुनौती दी थी. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी ने डीएचएफएल से कर्ज स्वीकृत कराने में गलत ब्योरे का इस्तेमाल किया था. यह मामला फंड को इधर-उधर करने से संबंधित है. इसलिए प्रार्थी को राहत नहीं दी जा सकती है.
2018 में 725 करोड़ रुपये का कर्ज कराया था स्वीकृत
उल्लेखनीय है कि मेसर्स कशिश डेवलपर्स की ओर से याचिका दायर कर एमसीए की जांच को चुनौती दी गयी थी. कंपनी ने वर्ष 2013 में गुरुग्राम में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किया था. वर्ष 2015 तक प्रोजेक्ट प्रगति पर था, लेकिन फंड की कमी की वजह से कंपनी ने वर्ष 2018 में प्रोजेक्ट के रिवाइवल के लिए डीएचएफएल से 725 करोड़ रुपये का कर्ज स्वीकृत कराया था. हालांकि, इसमें से डीएचएफएल ने केवल 503 करोड़ रुपये ही दिये.
फ्लैट खरीदारों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
इसके बाद डीएचएफएल दिवालिया हो गया. उसके बाद दो फ्लैट खरीदारों ने कंपनी से पैसे लौटाने की मांग की और आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत की. गुरुग्राम आर्थिक अपराध शाखा ने जांच के बाद शिकायतों को तथ्यहीन बताया. इसके बाद दोनों खरीदारों ने दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा में प्राथमिकी दर्ज करायी.
हाइकोर्ट ने इस प्राथमिकी को निरस्त कर दिया था. इसके बावजूद मंत्रालय ने कशिश डेवलपर्स के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले में जांच शुरू करायी.