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1.15 करोड़ रुपये मुआवजा नहीं देने पर रांची में बिहार परिवहन निगम की बस जब्त, सिविल कोर्ट परिसर में रखी गयी

रांची : सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के आश्रितों को मुआवजे का भुगतान नहीं करने के मामले में शुक्रवार को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की एक बस जब्त कर ली गयी. जब्त बस को सिविल कोर्ट रांची परिसर में रखा गया है. मुआवजा राशि का भुगतान होने के बाद ही बस को रिलीज किया जा सकेगा. मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी), रांची के कुर्की आदेश के अनुपालन के क्रम में यह कार्रवाई की गयी.
निगम को मूल मुआवजा राशि 93.38 लाख रुपये के साथ ब्याज मिलाकर लगभग 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.
सरकारी बस डिपो से जब्त की गयी बस
सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल, नायब नाजिर सत्यदेव कुमार, सहायक धर्मेंद्र सिंह और उनकी टीम ने चुटिया थाना के सहयोग से सरकारी बस डिपो में खड़ी बस को अटैच कर लिया. इसके बाद बस को सिविल कोर्ट रांची परिसर में लाकर खड़ा किया गया. एमएसीटी ने चार बसों को जब्त करने का आदेश दिया है, लेकिन डिपो में केवल एक बस मिली, जिसे अटैच कर लिया गया.
क्या है मामला
एमएसीटी, रांची ने एक दावा मामले में वर्ष 2024 में बीएसआरटीसी को 93,38,294 रुपये मुआवजा भुगतान करने का आदेश दिया था. उक्त मुआवजा राशि पर 26 मई 2023 से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया था.
मृतक की पत्नी और तीन बच्चों ने दायर की थी याचिका
आदेश का पालन नहीं होने पर मृतक विभूति प्रसाद सिंह की पत्नी मुन्नी देवी और उनके तीन बच्चों की ओर से याचिका दायर कर निगम की संपत्तियों की कुर्की की मांग की गयी थी. वहीं, निगम ने एकपक्षीय अवार्ड को वापस लेने के लिए एमएसीटी में आवेदन दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया.
इसके बाद निगम ने झारखंड हाइकोर्ट में सिविल रिव्यू दाखिल की. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को रिव्यू याचिका खारिज कर दी.