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जेल की बैरक में श्रद्धा ने फर्श पर बिछाया बिस्तर, मच्छरों की भनभनाहट और बेचैनी के बीच दोनों बहनें बात कर गुजारी पूरी रात

Lucknow Shiva Murder Case: शिवा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे और उसकी बहन रश्मि दुबे की जिंदगी महज कुछ दिनों में पूरी तरह बदल गई है. कभी आरामदायक फ्लैट और होटलों में वक्त बिताने वाली दोनों बहनों को अब जिला जेल की बैरक में फर्श पर बिस्तर बिछाकर रात गुजारनी पड़ रही है. जेल में पहली रात दोनों के लिए आसान नहीं रही. मच्छरों की भनभनाहट, अनजान माहौल और तमाम बंदिशों के बीच उनकी रात करवटें बदलते हुए बीती. उधर, श्रद्धा का चालक तनवीर उर्फ दानिश भी जेल में बेचैन नजर आया.
मच्छरों की भनभनाहट और बेचैनी के बीच गुजरी पहली रात
जेल में दाखिल होने के बाद श्रद्धा और रश्मि को महिला सर्किल की मुलाहिजा बैरक में रखा गया. बृहस्पतिवार रात भोजन करने के बाद दोनों काफी देर तक बैठकर बातचीत करती रहीं. बाद में अपने-अपने बिस्तर पर लेट गईं, लेकिन नए माहौल में उन्हें चैन की नींद नहीं आई. आरामदायक बिस्तरों की आदी दोनों बहनों के लिए फर्श पर सोना और मच्छरों के बीच रात बिताना एक अलग अनुभव रहा.
जेल पहुंचने के बाद भी बेबाक रहा श्रद्धा का अंदाज
जेल के अंदर भी श्रद्धा के तेवर में खास बदलाव नहीं दिखा. जेल अधिकारियों के मुताबिक, दाखिले की प्रक्रिया, तलाशी और पूछताछ के दौरान श्रद्धा आत्मविश्वास के साथ नजर आई. उसके व्यवहार में किसी तरह की झिझक दिखाई नहीं दी. शुरुआती औपचारिकताओं के दौरान भी उसका अंदाज बेबाक रहा. हालांकि, जेल के भीतर का माहौल और वहां की दिनचर्या बाहर की जिंदगी से बिल्कुल अलग है.
रात में सब्जी-दाल, सुबह नाश्ते में मिला दलिया और चाय
बृहस्पतिवार की रात श्रद्धा और रश्मि को आलू-लौकी की सब्जी और उड़द की दाल परोसी गई. शुक्रवार सुबह नाश्ते में दलिया और चाय दी गई. दोपहर के भोजन में रोटी, चावल, उड़द-राजमा की दाल और आलू-सोयाबीन की सब्जी मिली. दूसरी ओर, श्रद्धा का चालक तनवीर उर्फ दानिश भी पहली रात बेचैन रहा. हल्का भोजन करने के बाद वह लेट तो गया, लेकिन देर रात तक उसे नींद नहीं आई. जेलकर्मी तीनों बंदियों की निगरानी करते रहे.
दस दिन तक मुलाहिजा बैरक में रहेंगी दोनों बहनें
वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि श्रद्धा और रश्मि को महिला सर्किल की मुलाहिजा बैरक में रखा गया है. जेल नियमों के अनुसार, दोनों को शुरुआती दस दिन इसी बैरक में रहना होगा. इसके बाद उन्हें महिला सर्किल की दूसरी बैरक में स्थानांतरित किया जाएगा. इस अवधि में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.
दरवाजे पर टिकी रहीं निगाहें, लेकिन मिलने नहीं पहुंचा कोई अपना
श्रद्धा दुबे के लिए जेल की पहली सुबह से ही इंतजार का सिलसिला शुरू हो गया. शुक्रवार को उसे उम्मीद थी कि परिवार या कोई परिचित उसका हालचाल लेने पहुंचेगा, लेकिन शाम तक कोई मिलने नहीं आया. खबर के मुताबिक, उसके पिता एसपी दुबे और सौतेली मां भी उससे मिलने नहीं पहुंचे. बाहर की जिंदगी में सुविधाओं और लोगों के बीच रहने वाली श्रद्धा को जेल में अपनों की गैरमौजूदगी खलती रही.
हर आहट पर दरवाजे की ओर उठती रहीं नजरें
महिला सर्किल की मुलाहिजा बैरक में बहन रश्मि के साथ बैठी श्रद्धा की निगाहें बार-बार दरवाजे की ओर उठती रहीं. जेल में किसी बंदी से मुलाकात के लिए पर्ची लगने के बाद संबंधित बंदी तक सूचना पहुंचाई जाती है. ऐसे में हर आहट पर उसे किसी के आने की उम्मीद बंधती रही, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ. जेल सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा को किसी परिचित के आने के साथ ही 'सर' की ओर से पैरवी की भी उम्मीद थी. हालांकि, शुक्रवार शाम तक उससे मिलने कोई नहीं पहुंचा.
कपड़ों और जरूरी सामान के इंतजाम की भी चिंता
बृहस्पतिवार की रात जेल पहुंचते समय श्रद्धा अपने साथ कपड़े और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला जरूरी सामान नहीं ले गई थी. ऐसे में उसे और रश्मि को कपड़ों की व्यवस्था होने का इंतजार करना पड़ा. जेल की सीमित सुविधाओं के बीच दिनचर्या निभाना उसके लिए नई चुनौती बन गया. एक ओर परिवार से मुलाकात नहीं हुई, तो दूसरी ओर जरूरी सामान की कमी ने उसकी परेशानी बढ़ाई.
हजरतगंज और मड़ियांव थाने की जिम्मेदारी बदली
शिवा हत्याकांड में लापरवाही के मामले के बाद पुलिस विभाग में भी बदलाव किया गया है. इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा को हजरतगंज थाने का प्रभारी बनाया गया है, जबकि साइबर थाने के निरीक्षक आलोक राय को मड़ियांव थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उल्लेखनीय है कि इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया था.
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