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मीडिया से रूठे विजयवर्गीय, बोले-इंदौर में नहीं बोलूंगा:केपी की सिंधिया की सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा; दिव्यांग गुहार लगाता रहा, मंत्री भाषण देते रहे
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से एप पर मिलेगा। मीडिया से रूठ गए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया से रूठ गए हैं। खासकर इंदौर के मीडिया से। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने उनसे बात करनी चाही तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। कह दिया- मैं इंदौर में कोई बाइट नहीं दूंगा। दरअसल, कैलाश विजयवर्गीय अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ जाते हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा की महिला पार्षद संध्या यादव को लेकर टिप्पणी की थी। उनका यह बयान सुर्खियों में आया और कांग्रेस ने भी इसे मुद्दा बना लिया। विवाद बढ़ा तो विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए खेद भी जताया। उन्होंने कहा कि संध्या यादव उनकी बेटी जैसी हैं और उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। लेकिन अब मंत्री जी ने मीडिया से ही दूरी बना ली है। यानी बयान पर बवाल हुआ तो सफाई दी.. और सफाई भी खबर बन गई.. तो अब खबर बनाने वालों से ही दूरी बना ली। इधर, कांग्रेस ने विजयवर्गीय पर तंज कसा है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार में कैलाश विजयवर्गीय की चल नहीं रही है। उन्होंने विजयवर्गीय को इस्तीफा देने की सलाह देते हुए कहा- कैलाश भाई, स्वाभिमान भी कोई चीज है। इस्तीफा दे दो और स्वाभिमान के साथ जीवन जिओ। वैसे खरी बात ये है कि कैलाश विजयवर्गीय सार्वजनिक जीवन में हैं। जनप्रतिनिधि हैं.. सरकार का हिस्सा हैं.. मंत्री हैं। ऐसे में मीडिया से मुखातिब होना भी उनकी सार्वजनिक भूमिका का हिस्सा है। मीडिया के जरिये ही सरकार की बात जनता तक पहुंचती है। अब मीडिया से रूठे कैलाश विजयवर्गीय की स्थिति पर ये गाना बिल्कुल फिट बैठता है- ‘अजी रूठ कर अब कहां जाइएगा.. जहां जाइएगा हमें पाइएगा…’ भाषण में मशगूल रहे मंत्री, दिव्यांग की अनदेखी
भाजपा इन दिनों सेवा संकल्प अभियान चला रही है। इस अभियान में सेवा और जनसरोकार की बातें हो रही हैं, लेकिन सतना में एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें एक दिव्यांग मदद की उम्मीद लेकर मंत्री के सामने पहुंचा, लेकिन मंत्री भाषण देने में ही मशगूल नजर आए। हुआ यूं कि सतना में एक कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग व्यक्ति लड़खड़ाते हुए मंच के सामने मंत्री प्रहलाद पटेल के पास पहुंचा। उसने मंत्री से कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन मंत्री ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया और अपना भाषण जारी रखा। दिव्यांग को मंत्री के भाषण में बाधा डालते देख सांसद गणेश सिंह भी उठे और उसे रुकने को कहा। इसके बाद एक अधिकारी दिव्यांग व्यक्ति को वहां से लेकर चले गए। अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जिस सेवा संकल्प अभियान में सेवा को प्राथमिकता देने की बात हो रही है, वहां मंच पर भाषण ज्यादा जरूरी था या सामने खड़े दिव्यांग की बात सुनना? अब लोग कह रहे हैं कि नेताओं का सियासी शो-ऑफ, सेवा कार्य पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। केपी की गुना-शिवपुरी से चुनाव लड़ने की इच्छा
पूर्व सांसद केपी यादव ने इशारों में गुना-शिवपुरी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि अगर पार्टी उन्हें यहां से चुनाव लड़ने के लिए कहेगी तो वे यहीं आकर तैयारी शुरू कर देंगे। दरअसल, केपी यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में गुना-शिवपुरी सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर सांसद बने थे। तब सिंधिया कांग्रेस में थे। जब वे भाजपा में शामिल हुए तो पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव का टिकट काटकर इस सीट से सिंधिया को मैदान में उतारा और वे चुनाव जीतकर सांसद बने। अब केपी यादव के शिवपुरी से चुनाव लड़ने को लेकर दिए बयान ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। उनसे जब पूछा गया कि अगर पार्टी उन्हें शिवपुरी की जिम्मेदारी देती है तो क्या वे इसे निभाएंगे? इस पर उन्होंने कहा कि वे हमेशा तैयार हैं और दिल से तैयार हैं। केपी यादव ने यह भी कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है, जिसमें कभी भी किसी को कोई मौका मिल सकता है। अब उनके इस बयान को महज एक इच्छा माना जाए या फिर इसके पीछे कोई सियासी संकेत है, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। और अब अंदर की बात.. कलेक्टर बनने के लिए बेचैन आईएएस अफसर
मंत्रालय में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी इन दिनों कलेक्टर बनकर फील्ड पोस्टिंग पाने के लिए बेचैन हैं। इसके लिए वे काफी जुगाड़ भी लगा रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी मुराद पूरी होती नजर नहीं आ रही है। सुना है कि ग्वालियर-चंबल के एक कद्दावर नेता ने भी इस अधिकारी के लिए सिफारिश की है। इसके बावजूद अधिकारी की दाल गलती नहीं दिख रही है। बताया जा रहा है कि अभी ये अधिकारी मंत्रालय में जिस पद पर हैं, वहां उनका काम भी एवरेज ही चल रहा है। दरअसल, किसी ने उन्हें समझा दिया कि अगर यहां बहुत अच्छा काम कर लिया तो सरकार उन्हें यहां से बाहर ही नहीं जाने देगी। अब यही बात सरकार तक भी पहुंच गई है। ऐसे में कलेक्टर बनकर फील्ड में जाने की उनकी हसरत पर अभी तो ब्रेक लगता दिख रहा है। अब देखना यह है कि ये अधिकारी जहां हैं, वहीं बेहतर काम करने में जोर लगाते हैं या फिर फील्ड पोस्टिंग के लिए अपनी कोशिशें जारी रखते हैं। बता दें कि ये आईएएस अफसर ग्वालियर-चंबल संभाग के एक जिले में कलेक्टर रह चुके हैं। इनपुट सहयोग - संतोष शितोले और अमित सालगट (इंदौर), प्रशांत द्विवेदी (सतना), कपिल मिश्रा (शिवपुरी) ये भी पढ़ें -
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