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जिस घर में मातम था, वहां इतनी चमकती हुई कुर्सी कहां से आई? मांझी पर लोग उठा रहे सवाल

INT News12 October 2026 at 07:48 pm

Jitan Ram Majhi : गया के खिजरसराय स्थित बाना महादलित टोला में एक परिवार अपने दुख से गुजर रहा है. इसी परिवार से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की तस्वीर अब एक अलग वजह से चर्चा का विषय बन गई है. तस्वीर में मांझी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि आसपास कई लोग जमीन पर बैठे या खड़े दिखाई दे रहे हैं. साधारण घरों के बीच दिख रही कुर्सी को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं.

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दुख बांटने पहुंचे मांझी, लेकिन तस्वीर में कुर्सी पर चर्चा

जीतन राम मांझी ने अपने एक्स खाते पर तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बाना महादलित टोला निवासी स्वर्गीय कांति देवी के परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने परिवार को सांत्वना देने और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाने की बात कही. साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर परिवार को न्याय दिलाने को अपनी प्राथमिकता बताया.

ऐसे मौके पर परिवार के लिए सबसे जरूरी बात न्याय, मदद और दुख की घड़ी में साथ मिलना है. लेकिन तस्वीर सामने आने के बाद चर्चा परिवार के दुख से हटकर उस कुर्सी पर टिक गई, जिस पर मांझी बैठे दिखाई दे रहे हैं.

साधारण घरों के बीच कुर्सी को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

तस्वीर में आसपास के घर साधारण दिखाई देते हैं. कुछ लोग जमीन पर बैठे हैं, तो कुछ खड़े नजर आ रहे हैं. वहीं मांझी के बैठने के लिए रखी गई कुर्सी नई दिखाई देती है और उस पर एक स्टीकर भी नजर आता है.

इसी अंतर को देखकर लोग सवाल कर रहे हैं कि कुर्सी वहां किसने रखी थी और उसका इंतजाम किसने किया था. लोगों के मन में यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या कुर्सी पहले से परिवार के घर में थी या मांझी के आने पर वहां लाई गई थी.

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परिवार ने खरीदी थी कुर्सी या किसी ने किया इंतजाम?

इस तस्वीर से यह साबित नहीं होता कि कुर्सी परिवार ने खरीदी थी. इसकी कीमत क्या है, वह किसकी है और वहां कैसे पहुंची, इसकी भी पुष्टि नहीं है. इसलिए कुर्सी को परिवार की आर्थिक स्थिति से जोड़कर कोई पक्का दावा करना सही नहीं होगा.

फिर भी तस्वीर ने एक सवाल जरूर खड़ा किया है कि दुख की घड़ी में किसी परिवार से मिलने जाने पर वहां की व्यवस्था और लोगों के साथ व्यवहार को लेकर कितनी संवेदनशीलता दिखाई जाती है. किसी के दुख में शामिल होने का असली मतलब सिर्फ मुलाकात करना नहीं, बल्कि उसकी परेशानी को समझना और न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाना भी है.

लोग क्या बोले

काजल सिंह नाम की यूजर ने उनके पोस्ट के कमेन्ट किया, "सर साथ साथ कुर्सी का भी प्रचार कर रहे. और अपने लोगो के साथ कौन इतना उच्च कुर्सी पर बैठता है भला, अपनों के साथ जो जमीन पर बैठने का आनंद है वो इतनी उच्च कुर्सी पर बैठने से नहीं मिलेगा."

शिव नाम के यूजर ने लिखा, "यह चित्र आपको बता देगा कि जनार्दन कौन होते हैं. जनता या माननीय जी? समानता सबको चाहिए, लेकिन तभी तक, जब तक आप ऊंची कुर्सी तक न पहुंच जाएं."

छोरा गया वाला नाम के यूजर ने लिखा, "मांझी जी आपको बैठने के लिए भी मुशर्रफ टोला में चक्का कुर्सी लाया गया. सोचिए आप अपने समाज के लोगों में बराबरी में भी नहीं बैठ सकते. क्या विकास कीजिएगा महराज. वैसे भी भी कुछ किए नहीं है इतने दिनों में."

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