Monday, 12 October 2026
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डिजिटल अरेस्ट कर कारोबारी से ₹55 लाख ठगे, 3 गिरफ्तार:खातों में आई थी रकम, ISI-टेरर फंडिंग का डर दिखाकर 3 दिन कैद किया था

INT News12 October 2026 at 06:51 pm

रतलाम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 55 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को पकड़ा है जिनके खातों में ठगी की रकम आई थी। पुलिस ने हैदराबाद से 2 और कर्नाटक से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड लेकर पूछताछ की जाएगी। ताकि इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों का पता चल सके। रतलाम के माणकचौक थाना अंतर्गत रहने वाले ऑटो पार्ट्स व्यवसायी आशिक हुसैन को पिछले माह 16 से 18 सितंबर तक घर में डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। आशिक को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से संपर्क होने व टेरर (आतंकवादी) फंडिंग करने का डर बताकर डिजिटल अरेस्ट किया था। व्यवसायी का कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय है। पिछले 6 माह से यह रतलाम आए थे। व्यवसायी से करीब 55 लाख रुपए ठगे थे। प्राइवेट कंपनी के नाम से था खाता जांच के दौरान एक्सिस बैंक के खाते में व्यवसायी द्वारा जमा कराए गए। 35 लाख रुपए का पता चला। बैंक से जानकारी ली तो उक्त खाता SRI VENKATESHWARA PRI LIMITED नामक कंपनी से संबंधित था। खाते और कंपनी से संबंधित जानकारी के आधार पर पुलिस टीम हैदराबाद पहुंची। आरोपी कोडारी वेंकटेश से पूछताछ कर गिरफ्तार किया। जांच के दौरान बैंक खाते से संबंधित जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने धारवाड़, कर्नाटक से अशोक अन्यया को गिरफ्तार किया। दूसरे स्तर की जांच में सामने आया कि उक्त खातों में से एक अन्य के खाते में 5,00,084 रुपए ट्रांसफर हुए। संबंधित खाता धारत आरोपी मीर यूसुफ को भी पुलिस गिरफ्तार कर रतलाम लेकर आई। पुलिस अब इनका कोर्ट से रिमांड लेकर राशि प्राप्त करने, निकालने एवं आगे रुपए पहुंचाने में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की जांच करेगी। इन्हें किया गिरफ्तार इस तरह डिजिटल अरेस्ट कर ठगा था पुलिस के अनुसार 15 सितंबर 26 को एक अज्ञात व्यक्ति ने कॉल कर स्वयं को मुंबई के कोलाबा क्षेत्र का पुलिस अधिकारी बताया था। कॉल करने वाले ने व्यवसायी के मोबाइल नंबर के उपयोग, व्यवसाय एवं भारत में निवास के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद एक अन्य मोबाइल नंबर के संबंध में पूछताछ कर आरोप लगाया कि उक्त नंबर का इस्तेमाल पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े एजेंट से बातचीत के लिए किया है। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर स्वयं को पुलिस अधिकारी एवं वरिष्ठ निरीक्षक बताने वाले व्यक्तियों ने व्यवसायी को बताया कि उनके विरुद्ध संबंधित मोबाइल नंबर के उपयोग को लेकर एफआईआर दर्ज है। आरोपियों ने व्यवसायी से आधार कार्ड एवं पैन कार्ड संबंधी जानकारी प्राप्त कर एनओसी नहीं लेने की बात कहते हुए डर दिखाया था। हथियारों के साथ फोटो भेजी थी 16 सितंबर 26 को आरोपियों ने व्यवसायी से बात करते हुए कॉल को कथित रूप से एटीएस विभाग में ट्रांसफ0र करने का नाटक किया। इसके बाद वाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस वर्दी पहने व्यक्तियों से बात कराई। आरोपियों ने हथियारों से संबंधित कुछ तस्वीरें भेजकर उनमें व्यक्तियों की पहचान करने को कहा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड पर तैयार किए गए कथित दस्तावेज भेज मामला दर्ज होने की बात कही। 55 लाख रुपए जमा कराए बदमाशों ने व्यवसायी को को विश्वास दिलाया कि जांच एवं सत्यापन के लिए निर्धारित बैंक खातों में रकम जमा करानी होगी। सत्यापन के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर कुल 55 लाख रुपए अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से जमा करवा लिए। जब व्यापारी तीन दिन से घर से बाहर नहीं निकला। घर वालों के फोन कॉल तक नहीं रिसीव किए तो परिजन घर पहुंचे। तब डिजिटल अरेस्ट का पता चला। इसके बाद माणकचौक थाने पर सूचना देकर केस दर्ज करवाया। 20 लाख होल्ड करवाए सायबर सेल टीम द्वारा उस समय त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई राशि में से 20 लाख रुपए होल्ड करवाए। साथ ही पुलिस द्वारा बैंक खातों एवं ट्रांजेक्शन की जांच की। जांच के दौरान विभिन्न स्तरों पर बैंक खातों का उपयोग सामने आया, जिनके आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। एसपी अमित कुमार ने बताया प्रकरण में हैदराबाद से दो तथा धारवाड़, कर्नाटक से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ एवं बैंक खातों की जांच के माध्यम से अन्य संलिप्त व्यक्तियों और रकम के आगे के प्रवाह का पता लगाया जा रहा है।