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सीजेपी, किसान आंदोलन को स्पोर्ट करने वालों पर भड़के बिट्टा:युवाओं को लेकर जताई चिंता, बोले- एक साल की सैन्य ट्रेनिंग दी जाए
अगर सड़क पर कोई हादसा होता दिखाई दे तो मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने के बजाय पीड़ित की मदद करें और हादसा रोकने के लिए आगे आएं। किसी के घर में उसके परिजन इंतजार कर रहे होते हैं। हमारी छोटी-सी कोशिश किसी की जान बचा सकती है। यह बात एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष एमएस बिट्टा ने पानीपत में कही। उन्होंने बताया कि वे दो दिन पहले रात को शराब के नशे में ट्रक चला रहे एक ड्राइवर को पुलिस की मदद से पकड़वाने की घटना के संबंध में पानीपत पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते ट्रक को नहीं रुकवाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि इस दौरान बिट्टा विपक्षी दलों समेत किसान आंदोलन पर सीजेपी प्रोटेस्ट का समर्थन करने वालों पर भी भड़क उठे। सीजेपी प्रदर्शन पर बोले बिट्टा दिल्ली में चल रहे जेन-जी आंदोलन को लेकर एमएस बिट्टा ने कहा कि कुछ लोग युवाओं को आगे करके अपने हित साधना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे युवाओं को अगर कोई समस्या है तो उन्हें प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखनी चाहिए। उनके अनुसार, आज का युवा सोशल मीडिया से काफी प्रभावित है और इस कारण युवाओं को सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है। एमएस बिट्टा शनिवार को रेस्ट हाउस में पहुंचे थे। कपिल सिब्बल पर साधा निशाना उन्होंने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल जैसे लोग रात को अफजल के केस में रात को अदालतें खुलवा दी थी। ये लोग जेएनयू में कहते थे भारत मां तेरे टुकड़े होंगे। ये वे लोग कहते थे हिंदुस्तान को बांग्लादेश बना देंगे। ये वे लोग हैं। इन जैसे लोग सड़कों पर आकर हालात खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। युवाओं को दी जानी चाहिए ट्रेनिंग बिट्टा ने युवाओं को अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का महत्व समझाने पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल से कॉलेज जाने की उम्र में युवाओं को एक साल की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने इजरायल की व्यवस्था का उदाहरण दिया। उनका मानना है कि इस तरह की ट्रेनिंग से युवाओं में अनुशासन, जिम्मेदारी और देश के प्रति कर्तव्य की भावना विकसित की जा सकती है। किसान आंदोलन पर बोले बिट्टा किसान आंदोलन पर बिट्टा बोले कि ये आंदोलन यूपी, राजस्थान, गुजरात में क्यों नहीं था। ये यहीं क्यो हुआ। इसके पीछे कौन लोग थे। इस देश की जिम्मेदारी हर व्यक्ति को उठानी चाहिए। अगर किसी को दिक्कत है तो उसे पुलिस प्रशासन के पास जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की हिंसा का जिक्र कर बोले- बेगुनाहों की जान गई एमएस बिट्टा ने जम्मू-कश्मीर में पहले हुए दंगों और हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की जान गई थी। उन्होंने करीब 36 हजार बेगुनाहों की हत्या होने का दावा किया और कहा कि लोगों को घरों, ट्रेनों और बसों से निकालकर मारा गया था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले जैसे हालात से लोगों को राहत मिली है। खालिस्तान के मुद्दे पर भी बिट्टा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस नाम को देश और समाज को बांटने वाली सोच से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने इसे लेकर कड़ा रुख जताया और कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना जरूरी है।