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इंटरनेट इस्तेमाल करना बच्चों का मौलिक अधिकार, उम्र के आधार पर पाबंदी से SC का इनकार

INT News17 October 2026 at 01:49 pm

अदालत ने कहा कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए उनके इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती. बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनके मौलिक अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि उम्र के आधार पर इंटरनेट पर पाबंदी लगाने से बच्चे अनजान और अधिक जोखिम भरी वेबसाइटों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऑनलाइन किसी के बहकावे में आने या धमकी मिलने पर भी वे माता-पिता या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताने से हिचक सकते हैं. उन्हें डर हो सकता है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण उन्हें सजा मिलेगी.

आपत्तिजनक सामग्री को हटाने में देरी पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा दिशानिर्देशों के बावजूद इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) का प्रसार जारी है. अदालत ने संबंधित नियामक संस्थाओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के रवैये पर सवाल उठाते हुए पीड़ित बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रीडायरेक्ट लिंक और वेबसाइटों के माध्यम से ऐसी सामग्री के कथित पेड प्रमोशन का मामला भी सामने आया.

अदालत ने मौजूदा व्यवस्था की खामी बताते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री को पहचानने और हटाने की प्रक्रिया मुख्य रूप से व्यक्तिगत शिकायतों पर निर्भर करती है. एक प्लेटफॉर्म पर सामग्री हटाए जाने के बाद दूसरे प्लेटफॉर्म पर उसकी पहचान अपने आप नहीं हो पाती. नतीजतन, आपत्तिजनक सामग्री को पूरी तरह हटाने में देरी होती है और उसका प्रसार जारी रह सकता है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले में अधिकारियों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की प्रभावी कार्रवाई का और इंतजार नहीं किया जा सकता.

राष्ट्रीय डेटाबेस से होगी सामग्री की पहचान

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया. इसमें सामग्री के डिजिटल फिंगरप्रिंट यानी परसेप्चुअल हैश और यूआरएल का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद एक जैसी सामग्री की पहचान करना और उसे हटाना आसान हो सकेगा.

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में गलत पहचान के कारण किसी सामग्री को हटाने से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए. केवल एक शिकायत के आधार पर किसी कंटेंट को हटाने या डेटाबेस में शामिल करने का फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. इसके लिए उचित जांच और सत्यापन जरूरी होगा.

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प्राथमिक स्कूल से ही बच्चों को किया जाए जागरूक

सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक कक्षाओं से ही बच्चों को इंटरनेट की सुरक्षा और ऑनलाइन खतरों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया. इसके लिए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत बताई गई, ताकि बच्चे ऑनलाइन दुर्व्यवहार या धमकी का सामना करने पर बिना डर मदद मांग सकें.