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कोल इंडिया के कर्मचारियों और रिटायर कर्मियों को चयनित अस्पतालों में मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

INT News17 October 2026 at 12:48 pm

Coal India Cashless Treatment: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) ने अपने कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के इलाज के लिए चयनित अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तय कर दी है. इसके तहत अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए रेफरल ऑर्डर और कैशलेस ऑथराइजेशन लेटर जारी किया जायेगा. इन अस्पतालों में इलाज के मेडिकल बिलों का भुगतान सीधे कोल इंडिया मुख्यालय करेगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य चिकित्सा संबंधी अनुरोधों के निबटारे में एकरूपता लाना और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है.

कोल इंडिया की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, कैशलेस सुविधा केवल मुख्यालय द्वारा चिह्नित सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने पर लागू होगी. इनमें अपोलो समूह के 38 अस्पताल, कोलकाता स्थित टाटा मेडिकल सेंटर, बेंगलुरु स्थित नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज और नौ अन्य सूचीबद्ध अस्पताल शामिल हैं. अस्पतालों को भुगतान संबंधित समझौते की शर्तों और निर्धारित दरों के अनुसार किया जायेगा. अन्य नौ अस्पतालों के मामले में सीजीएचएस पैकेज दरों और कोल इंडिया के साथ हुए समझौते के प्रावधानों के आधार पर भुगतान होगा.

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अनुषंगी कंपनी के चिकित्सा अधिकारी जारी करेंगे अनुमति पत्र

एसओपी के अनुसार, संबंधित अनुषंगी कंपनी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) या चिकित्सा सेवा प्रभारी (सीएमएस इन-चार्ज) रेफरल ऑर्डर और कैशलेस अनुमति पत्र जारी करेंगे. इसके लिए निर्धारित प्रारूप का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा. अनुषंगी कंपनी को संबंधित अस्पताल और कोल इंडिया मुख्यालय के आधिकारिक ई-मेल पर जरूरी दस्तावेज भेजने होंगे. मुख्यालय से अस्पताल को मंजूरी संबंधी ई-मेल मिलने के बाद ही कैशलेस सुविधा का लाभ मिल सकेगा.

कार्यरत कर्मचारियों के मामले में संबंधित चिकित्सा अधिकारी रेफरल ऑर्डर जारी करेंगे. वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अस्पताल को इलाज की प्रस्तावित योजना, भर्ती की सूचना, खर्च का अनुमान, मरीज की केस हिस्ट्री और मेडिकल कार्ड की प्रति संबंधित अनुषंगी कंपनी को भेजनी होगी. इन दस्तावेजों के आधार पर कैशलेस अनुमति पत्र जारी किया जायेगा. इसमें मरीज का विवरण, बीमारी, अस्पताल की ओर से अनुमानित खर्च और कैशलेस इलाज के लिए स्वीकृत राशि का उल्लेख करना अनिवार्य होगा.

एक बार भर्ती के लिए मान्य होगी मंजूरी

नियमों के अनुसार, रेफरल ऑर्डर या कैशलेस अनुमति पत्र के आधार पर मिली मंजूरी सामान्यतः एक बार भर्ती होकर इलाज कराने के लिए मान्य होगी. हालांकि, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और हीमोडायलिसिस के मामले में अनुमति पत्र में उल्लेखित सत्रों की संख्या के अनुसार सुविधा मिलेगी. कैशलेस इलाज का लाभ केवल रेफरल में दर्ज बीमारी के उपचार तक सीमित रहेगा. किसी अन्य बीमारी की जांच या इलाज कराने के लिए अलग से अनुमति लेना जरूरी होगा.

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मरीज के हस्ताक्षर वाला मूल बिल जमा करना अनिवार्य

कोल इंडिया ने मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए जरूरी दस्तावेजों से जुड़े नियम भी तय किये हैं. अस्पताल को मरीज या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर वाला मूल बिल जमा करना होगा. इसके साथ रेफरल ऑर्डर या कैशलेस अनुमति पत्र और मुख्यालय की मंजूरी वाले ई-मेल का प्रिंटआउट देना अनिवार्य होगा. भुगतान के लिए बैंक खाते का विवरण भी जमा करना होगा. महंगी दवाओं और इंप्लांट के मामले में संबंधित इनवॉयस भी देना होगा. इलाज पूरा होने या मरीज की छुट्टी के 15 दिनों के भीतर अंतिम बिल भेजने का प्रावधान किया गया है.

इन खर्चों का भुगतान नहीं करेगा कोल इंडिया

एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि कॉस्मेटिक सामान, फोन कॉल, कपड़े धुलाई, टॉयलेट संबंधी वस्तुओं और अलग से वसूले जाने वाले भोजन आदि का खर्च कोल इंडिया नहीं उठायेगा. इन खर्चों का भुगतान मरीज या संबंधित कर्मचारी को करना होगा. वहीं, निर्धारित श्रेणी से ऊंचे स्तर के कमरे में रहने पर होने वाले अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी भी मरीज की होगी.

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