Friday, 25 September 2026
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खंडवा में चरस तस्कर को 10 साल जेल:पुलिस ने 18.50 लाख की चरस जब्त की थी, कोर्ट ने ₹1 लाख जुर्माना भी लगाया

INT News25 September 2026 at 09:56 am

खंडवा रेलवे स्टेशन पर मादक पदार्थ चरस के साथ पकड़े गए आरोपी को कोर्ट ने गुरुवार को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी सीमरूद्दीन शेख पिता सरफुद्दीन शेख (35) निवासी इंदौर को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी मानते हुए 10 साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया। अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी अतिरिक्त सहायक निदेशक अभियोजन रामदास जमरे ने की। अभियोजन के अनुसार, घटना 3 जून 2024 की दरम्यानी रात की है। थाना कोतवाली खंडवा पुलिस को सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन खंडवा के प्लेटफॉर्म नंबर-6 के पीछे एक व्यक्ति काले रंग के कपड़े पहने हुए है। उसके पास कपड़े की थैली में मादक पदार्थ है और वह ट्रेन से भागने की फिराक में है। सूचना मिलने के बाद टीआई दिलीपसिंह देवड़ा के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टीम में एसआई चंद्रकांत सोनवने, एएसआई जितेंद्र तिवारी, प्रधान आरक्षक लतेश तोमर, अमित यादव सहित पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस टीम ने मुखबिर द्वारा बताए स्थान पर पहुंचकर प्लेटफॉर्म नंबर-6 की सीढ़ियों के सामने संदिग्ध व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ लिया। थैली में मिली थी 18 लाख की चरस

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सीमरूद्दीन शेख बताया। पुलिस ने उसके कब्जे में रखी कपड़े की थैली की तलाशी ली। इसमें पॉलीथिन में काले-कत्थई रंग का मादक पदार्थ मिला। आरोपी ने इसे चरस बताया। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक कांटे से मादक पदार्थ का वजन किया तो पॉलीथिन सहित कुल वजन 3 किलो 700 ग्राम निकला। बरामद चरस की अनुमानित कीमत 18 लाख 50 हजार रुपए बताई गई। पुलिस ने चरस के साथ आरोपी का मोबाइल फोन और मादक पदार्थ रखने के लिए इस्तेमाल की गई कपड़े की थैली भी जब्त की। मौके की कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने केस दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया था चालान

पुलिस ने मामले में जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आरोपी के कब्जे से चरस की बरामदगी, मौके की कार्रवाई और अन्य साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा। इन तथ्यों के आधार पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी मानते हुए 10 साल के कारावास और 1 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।