Friday, 25 September 2026
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Cyclone Arnab Updates: धान के साथ इन फसलों पर भी मंडरा रहा खतरा, IMD का अलर्ट

INT News25 September 2026 at 10:50 am

Cyclone Arnab Updates: बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन और उससे जुड़े खराब मौसम का असर ओडिशा, तेलंगाना और आसपास के इलाकों में कृषि पर भी पड़ रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की कृषि सलाह के मुताबिक भारी बारिश के दौरान खेतों में पानी जमा होने से धान के अलावा मक्का, कपास, दलहन, मूंगफली और सब्जियों पर भी असर पड़ सकता है.

कपास में फूल और बॉल गिरने का खतरा

तेलंगाना के कपास उत्पादक इलाकों में लगातार बारिश से खेतों में जलभराव होने पर फसल की जड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. हालांकि, कुछ इलाकों में हाल की बारिश से किसानों को राहत भी मिली है और कपास समेत कई फसलों को पानी की कमी से बचने में मदद मिली है.

मक्का की फसल में जलभराव बन सकता है परेशानी

IMD की कृषि सलाह में ओडिशा के कुछ कृषि क्षेत्रों में मक्का की बुवाई टालने तथा पहले से लगी फसल के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह दी गई है. लगातार पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों में हवा की कमी हो सकती है और फसल प्रभावित हो सकती है.

दलहन में भी अतिरिक्त पानी से नुकसान

अरहर, मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों के लिए भी खेतों में जल निकासी बनाए रखना जरूरी बताया गया है. IMD की सलाह में दक्षिण झारखंड समेत प्रभावित क्षेत्रों में धान, मक्का और दलहन के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने पर जोर दिया गया है.

मूंगफली और सब्जियों को भी संभालना जरूरी

भारी बारिश के दौरान मूंगफली और सब्जियों के खेतों में पानी भरने से फसल को नुकसान हो सकता है. IMD ने प्रभावित कृषि क्षेत्रों में मूंगफली और सब्जियों से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह दी है. सब्जियों की नर्सरी और खड़ी फसल के लिए भी उचित जल निकासी जरूरी बताई गई है.

केला-पपीता जैसी बागवानी फसलों पर भी नजर

तेज हवा और भारी बारिश के दौरान केले और पपीते के पौधों के गिरने की आशंका रहती है. IMD की कृषि सलाह में केला और पपीता के पौधों को सहारा देने तथा खेतों में जल निकासी की व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया है.

किसानों के लिए क्या सलाह?

मौसम विभाग के अनुसार इस तरह की बारिश में सबसे जरूरी है कि खेतों में पानी को ज्यादा देर तक जमा न होने दिया जाए. प्रभावित किसान जल निकासी की व्यवस्था करें, नई बुवाई या रोपाई को भारी बारिश की अवधि में टालें और कमजोर पौधों को आवश्यकतानुसार सहारा दें.

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