Friday, 25 September 2026
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नोएडा बस हादसे के बाद खुली लापरवाही की पोल, 1.75 लाख के 19 चालान के बावजूद दौड़ रही थी बस, नहीं था इंश्योरेंस

INT News25 September 2026 at 10:46 am

Greater Noida Bus Accident : ग्रेटर नोएडा के दयानतपुर गांव के पास बुधवार रात हुए स्लीपर बस हादसे ने बसों की फिटनेस और परिवहन विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे का शिकार हुई बस पर 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे. इसके बावजूद बस का संचालन जारी था. बताया गया कि बस अनफिट थी और उसका इंश्योरेंस भी नहीं था.

दिल्ली से महोबा जा रही थी बस

बस दिल्ली से महोबा जा रही थी और यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे का शिकार हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, बस राज कल्पना ट्रैवल्स की थी और छतरपुर जिले के बिजावर विधानसभा क्षेत्र के दियोरान निवासी राजकुमार शर्मा से जुड़ी बताई गई है. बस पर पहले से चालान होने के बावजूद वह अलग-अलग आरटीओ क्षेत्रों से गुजरती हुई चल रही थी.

रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि जांच और कार्रवाई के बावजूद ऐसी बसों का संचालन कैसे जारी रहता है. इसके लिए बस संचालकों के साथ परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं.

आग लगने के बाद बस में मची अफरातफरी

ग्रेटर नोएडा के दयानतपुर गांव के पास बुधवार रात बस में आग लग गई. आग इतनी भीषण थी कि कई यात्रियों के शव बुरी तरह झुलस गए. कुछ शव बस की गैलरी में मिले, जबकि कुछ यात्रियों के शरीर के हिस्से फर्श से चिपके हुए थे.

आग बुझाने के बाद बस के पिछले हिस्से को काटकर शवों के अवशेष बाहर निकाले गए. रेस्क्यू टीम के मुताबिक, बस में करीब 35 लोग सवार थे. हादसे में नौ यात्रियों के शव निकाले गए. शवों के अधिक जल जाने के कारण उनकी पहचान में भी परेशानी आ रही थी.

प्रारंभिक आकलन में आशंका जताई जा रही है कि बस में आग एसी में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी होगी.

19 चालान के बाद भी जारी रहा बस का संचालन

रिपोर्ट के अनुसार, हादसे का शिकार बस पर 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे. इसके बावजूद बस का संचालन किया जा रहा था. रिपोर्ट में बताया गया कि बस अनफिट थी और उसके पास इंश्योरेंस भी नहीं था.

बस पर सुरक्षा उपकरणों को लेकर भी सवाल उठे हैं. रिपोर्ट में बसों की फिटनेस और फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच को लेकर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया गया है.

स्लीपर बसों की सुरक्षा पर भी सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्लीपर बसें पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से आगरा और फिर यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते लंबी दूरी तय करती हैं. चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं और जुर्माना भी लगाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कुछ बस ऑपरेटर नियमों का पालन नहीं करते.

आरटीओ प्रवर्तन, लखनऊ जोन के प्रभात पांडेय के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ बस संचालक बसों में छेड़छाड़ करते हैं, जो हादसे की वजह भी बनती है.

फायर सेफ्टी इंतजाम पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हादसे वाली बस में फायर सेफ्टी के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं थे. इससे पहले लखनऊ के मोहनलालगंज में हुए बस हादसे का भी जिक्र किया गया है. उस मामले में भी बस अनफिट बताई गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी-17 एटी 6372 नंबर की बस बिहार के बेगूसराय से दिल्ली जा रही थी. उस हादसे में पांच लोगों की जान गई थी.

लंबी दूरी की बसें सिंगल ड्राइवर के भरोसे

रिपोर्ट में लंबी दूरी की बसों में सिंगल ड्राइवर के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया गया है. बिहार, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए चलने वाली बसों में कई बार एक ही ड्राइवर के भरोसे लंबी दूरी तय करने की बात कही गई है.

बसें पूरी रात चलती हैं और कई बार झपकी आने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बसों में सुरक्षा के लिए फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) लगाए जाने और 10 किलोग्राम क्षमता के अग्निशमन यंत्र रखने की जरूरत है.

एटीएस में फिटनेस का खेल?

रिपोर्ट में बसों के परमिट और फिटनेस को लेकर भी परिवहन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं. इसमें गोरखपुर के एक मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर का जिक्र है, जिन पर अनफिट बस को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का आरोप लगाया गया है. साथ ही निजी फिटनेस सेंटरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.

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