Friday, 25 September 2026
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चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट पर नोएल टाटा की आपत्ति खारिज, टाटा संस ने बताया फैसला वैध

INT News25 September 2026 at 09:47 am

टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की आपत्ति को खारिज करते हुए एन. चंद्रशेखरन की तीसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति को वैध बताया है. कंपनी ने 24 सितंबर को नोएल टाटा को भेजे पत्र में कहा कि 17 सितंबर को निदेशक मंडल ने लागू कानून और कंपनी के Articles of Association के तहत बहुमत से चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का फैसला किया था. टाटा संस ने अपने फैसले के समर्थन में तीन कानूनी राय का भी हवाला दिया है. इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय यू. ललित और पूर्व न्यायाधीश बी. एन. श्रीकृष्ण की राय शामिल है.

चयन समिति के नियम को लेकर टाटा संस ने दिया यह तर्क

टाटा ट्रस्ट्स की ओर से चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर आपत्ति जताई गई थी. ट्रस्ट का तर्क है कि टाटा संस के Articles of Association के तहत ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों की जरूरी सहमति के बिना यह फैसला वैध नहीं माना जा सकता. वहीं, टाटा संस का कहना है कि जिस विशेष चयन प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है, वह नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए है. मौजूदा चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होती.

17 सितंबर को क्या हुआ था

17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड में चंद्रशेखरन को एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ था. प्रस्ताव के पक्ष में चार निदेशकों ने वोट किया, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशकों में वेणु श्रीनिवासन ने प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि नोएल टाटा इसके खिलाफ रहे. इसी बराबरी की स्थिति में चेयरमैन के निर्णायक मत यानी casting vote के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हुआ.

पूर्व न्यायाधीश बी. एन. श्रीकृष्ण और उदय यू. ललित की कानूनी राय टाटा संस के पक्ष में गई है. श्रीकृष्ण के अनुसार बोर्ड की कार्रवाई कंपनी के Article 121 के अनुरूप थी. वहीं, उदय यू. ललित की राय में मतदान के दौरान बराबरी की स्थिति बनने पर चेयरमैन का निर्णायक मत इस्तेमाल किया जा सकता है. वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप्तो सरकार ने भी अपनी राय में कहा है कि संबंधित प्रावधान के तहत चेयरमैन के casting vote की अनुमति है.

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा यही है कि ट्रस्ट के नामित निदेशकों के बीच 1-1 वोट होने की स्थिति में चेयरमैन का निर्णायक मत इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं. ट्रस्ट्स इस व्याख्या से सहमत नहीं है, जबकि टाटा संस का कहना है कि कंपनी के उपनियम इस तरह की स्थिति में casting vote की अनुमति देते हैं.

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है. फिलहाल चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है. तीसरे कार्यकाल को लेकर दोनों पक्षों की कानूनी व्याख्या अलग होने से यह मामला अब टाटा संस के कॉरपोरेट गवर्नेंस और बोर्ड के अधिकारों से जुड़े बड़े विवाद के रूप में सामने आया है.