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पठानकोट में एक मंच पर 14 देशों के दिग्गज:‘टेडएक्स कैलेडोनियन’ का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न; लोकतंत्र-'हैप्पीनेस' जैसे मुद्दों पर मंथन
पठानकोट में पहली बार 4 देशों के पूर्व प्रधानमंत्री सहित 14 देशों के दिग्गज नेता, बिजनेसमैन और अधिकारी एक मंच पर नजर आए। समाज सेवक और शिक्षाविद सृजल गुप्ता के प्रयासों से पठानकोट में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन ‘टेडएक्स कैलेडोनियन’ का अत्यंत भव्य और सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। 'द वर्ल्ड कम्स टू पठानकोट' की अनूठी थीम पर आधारित यह महा-सम्मेलन स्थानीय ढांगू रोड स्थित होटल में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य रूप से स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, लक्ज़मबर्ग, स्विट्जरलैंड, बुल्गारिया, यूरोपीय संघ और फिलीपींस सहित कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इनमें माल्टा के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट, रोमानिया के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर पोंटा, मोल्दोवा के पूर्व प्रधानमंत्री इयूरी लंका और स्लोवाकिया के पूर्व प्रधानमंत्री एडुआर्ड हेगर जैसे बड़े नाम शामिल रहे। इटली की पीएम और अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने भेजे संदेश इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के मंच पर कोई एक या दो नहीं, बल्कि दुनिया भर के 14 विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों और वैश्विक विचारकों ने हिस्सा लेकर पठानकोट की धरती को नमन किया। वहीं, इटली की वर्तमान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर जैसी विश्व की सर्वोच्च राजनीतिक हस्तियों ने इस आयोजन के लिए विशेष रूप से अपने ऑनलाइन शुभकामना संदेश भेजे। वैश्विक नेताओं की सूची में इटली के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लुइगी डि माओ, यूके (UK) के पूर्व रक्षा मंत्री सर ग्रांट शाप्स, स्वीडन की न्याय मंत्री पॉलिना ब्रांडबर्ग और भारत से सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने मंच साझा किया। इनके अलावा, यूरोपीय संसद के सदस्य टॉमस ज़ेडेकोवस्की, मिलिना एंजेलोवा (यूरोपीय आर्थिक और सामाजिक समिति की सदस्य), यूक्रेन की सांसद लिसा यास्को, फिनलैंड के सांसद विले मेरिनेन और लक्ज़मबर्ग के सांसद पॉल गैल्स व स्वेन क्लेमेंट भी उपस्थित रहे। व्यापार और कानून जगत से 'बिनांस' के राज टिमोथी नंदवानी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष परदीप राय ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई। दुनिया के इन दिग्गज नेताओं ने न सिर्फ पठानकोट की धरती पर कदम रखा, बल्कि यहां के लोगों के साथ अपने विचार, विजन और वैश्विक अनुभव भी साझा किए। अंतरिक्ष, कानून, लोकतंत्र और 'हैप्पीनेस' जैसे अहम मुद्दों पर हुआ मंथन इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर विभिन्न देशों से आए वक्ताओं ने अपने विजन और आइडियाज साझा किए। वक्ताओं ने अंतरिक्ष, कानून, लोकतंत्र और खुशी जैसे उन अहम और संवेदनशील मुद्दों पर गहराई से चर्चा की, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हर इंसान के जीवन को प्रभावित करते हैं। लक्ज़मबर्ग से आए सांसद स्वेन क्लेमेंट ने 'स्पेस डेटा सेंटर्स' के अत्याधुनिक विषय पर बात करते हुए एक बेहद हैरान करने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में एक फ्रिज के आकार के छोटे से उपकरण ने महान लेखक विलियम शेक्सपियर के सारे साहित्य और काम को मात्र 15 मिनट के भीतर डिकोड कर दिया था। इसी तरह, फिनलैंड से आए एक विशेष वक्ता ने 'हैप्पीनेस' (खुशी) के विषय पर बहुत ही प्रासंगिक विचार रखे। उन्होंने बताया कि इंसान के पास चीजें चाहे कम हों या ज्यादा, उसे जीवन में सच्ची खुशी और संतुष्टि कैसे मिल सकती है। युवाओं के लिए मास्टरस्ट्रोक: 'जंक्शन एक्स' करेगा प्रतिभा का सम्मान इस प्रतिष्ठित मंच से सृजल गुप्ता ने पठानकोट और आसपास के युवाओं के लिए एक बेहद शानदार, क्रांतिकारी और दूरदर्शी पहल 'जंक्शन एक्स' की भी घोषणा की और भारी उत्साह के बीच इसका पोस्टर लॉन्च किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि 'जंक्शन एक्स' 18 से 25 साल के युवाओं के लिए एक ऐसा विशाल अंतरराष्ट्रीय मंच होगा, जहां दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के जज आकर हमारे बच्चों के टैलेंट को परखेंगे। इस मंच के जरिए जो होनहार युवा विजेता बनेंगे या जो इस अवसर के योग्य होंगे, उन्हें आगे की विशेष ट्रेनिंग और शानदार जॉब प्लेसमेंट के लिए फिनलैंड भेजा जाएगा। सृजल गुप्ता ने कहा कि इसका मुख्य मकसद यह है कि हमारे स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतरीन अवसरों के लिए महानगरों या विदेशों में दर-दर न भटकना पड़े, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के अवसर खुद उनके दरवाजे पर आएं। संस्कृतियों का सच्चा 'संगम' है पठानकोट, तीर्थ का मिले दर्जा सृजल गुप्ता ने पठानकोट की भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे एक सच्चा 'संगम' करार दिया। उन्होंने कहा कि पठानकोट सिर्फ एक शहर, एक किनारा या बॉर्डर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा खूबसूरत संगम है जहां पंजाबी, हिंदी, डोगरी और पहाड़ी भाषाएं तथा संस्कृतियां एक साथ आकर मिलती हैं। अगर कोई पठानकोट के बाजारों में चला जाए, तो उसे यह चारों भाषाएं एक साथ सुनने को मिल जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में 'संगम' हमेशा से पूजनीय रहा है, इसलिए तीन-चार संस्कृतियों के इस संगम (पठानकोट) को भी एक 'तीर्थ' का दर्जा मिलना चाहिए। सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने की सृजल गुप्ता की प्रशंसा पठानकोट जैसे छोटे लेकिन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय 'TEDx' कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम में पठानकोट शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों, व्यापार मंडलों, इंडस्ट्री एसोसिएशन और शहर के आम नागरिकों ने पूरे जोश के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने एक सुर में कहा कि पठानकोट के मंच पर 14 देशों के नेताओं को एक साथ खड़ा देखना उनके जीवन के सबसे गर्व के क्षणों में से एक है।