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आरटीआई लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम, सवाल पूछना न छोड़ें : सरयू राय

जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित चेंबर ऑफ कॉमर्स भवन के भगवान जी पारिख हॉल में सोमवार को आरटीआई दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सूचना का अधिकार अधिनियम और नागरिक सहभागिता: प्रासंगिकता, जवाबदेही एवं समकालीन चुनौतियां विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन आरटीआई कार्यकर्ता संघ केंद्रीय समिति द्वारा किया गया.
सेमिनार में शहर के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया. मौके पर मुख्य अतिथि जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने अपने संबोधन में कहा कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र को सशक्त बनाने का आधार है. यह कानून शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने का सबसे प्रभावी जरिया है.
नागरिकों को इस अधिकार का प्रयोग समाज के हित में पूरी जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आरटीआई के क्रियान्वयन पर चिंता जताते हुए कहा कि आज इस कानून के सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं. आरटीआई कार्यकर्ताओं को न केवल सूचना हासिल करने में प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ता है, बल्कि कई बार उन्हें धमकियों, डर और दबाव का भी सामना करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं की एकजुटता, कानूनी जागरूकता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है.
इस एक दिवसीय सेमिनार में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, बुद्धिजीवी, आरटीआई कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं शामिल हुए. मौके पर विजय सिंह मुंडा, ऋशेंदु केसरी, दिनेश कर्मकार, कांग्रेस महतो, सुनील कुमार प्रसाद, आशुतोष कर्मकार, सुसेन गोप, नीलकमल गोप, सुलोचना देवी और सुनील मुर्मू सहित कई अन्य उपस्थित थे.
प्रजातंत्र में जनता सर्वोपरि, सवाल पूछना न छोड़ें
कुणाल षाडंगी विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक सह झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाडंगी ने कहा कि प्रजातंत्र में जनता ही सर्वोपरि है. इसलिए नागरिकों को आरटीआई के तहत सवाल पूछने का अपना अधिकार कभी नहीं छोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की भी यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी जवाब दे.
हालांकि, उन्होंने माना कि हाल के दिनों में आरटीआई का सही जवाब पाना आसान नहीं रह गया है.सेमिनार में आरटीआई कार्यकर्ता संघ केंद्रीय समिति के अध्यक्ष दिलबहादूर, महासचिव कृतिवास मंडल तथा उपाध्यक्ष पूर्वी घोष व मुश्ताक अहमद ने भी अपने विचार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है.