Monday, 12 October 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · बिहार

यूट्यूूब पर सीखा ड्रैगन फ्रूट की खेती का तरीका, महीने के 1 लाख से अधिक कमा रहे मधुबन के सतीश

INT News12 October 2026 at 10:17 am

Dragon Fruit Farming: खेती में कुछ नया करने की सोच हो तो पारंपरिक फसलों के साथ दूसरे विकल्प भी आजमाए जा सकते हैं. पूर्वी चंपारण के मधुबन प्रखंड की दुलमा पंचायत के जितौरा वार्ड संख्या 15 निवासी सतीश प्रसाद कुशवाहा ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश की है. करीब चार साल पहले यूट्यूब पर इस फल की खेती के बारे में जानकारी लेने के बाद उन्होंने अपने खेत में पौधे लगाए. शुरुआती चुनौतियों के बावजूद अब तक वह लागत निकालकर एक लाख रुपये से अधिक की कमाई करने का दावा करते हैं.

यूट्यूब से मिली जानकारी, करनाल से मंगाए 204 पौधे

सतीश प्रसाद कुशवाहा बताते हैं कि करीब चार साल पहले उन्होंने यूट्यूब पर ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ी जानकारी देखी थी. इसके बाद उन्होंने हरियाणा के करनाल से 204 पौधे मंगवाए और खेत में 51 पिलर पर लगाए. शुरुआत में पौधों की देखभाल और खेती की नई पद्धति को समझने में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

उन्होंने धैर्य के साथ पौधों की देखभाल जारी रखी. करीब डेढ़ साल बाद पौधों में फल आने लगे. इसके बाद उन्हें इस खेती से कमाई होने लगी. सतीश की पहल अब आसपास के किसानों के बीच भी चर्चा का विषय बन रही है.

65 हजार रुपये की लागत, एक लाख से अधिक कमाई का दावा

सतीश के अनुसार, पौधे मंगाने, उन्हें लगाने और फल तैयार करने तक करीब 65 हजार रुपये खर्च हुए. उत्पादन शुरू होने के बाद उन्होंने अपनी लागत निकाल ली और अब तक एक लाख रुपये से अधिक की कमाई कर चुके हैं.

उनका कहना है कि ड्रैगन फ्रूट के पौधों की उचित देखभाल की जाए तो वे कई वर्षों तक फल दे सकते हैं. इसी संभावना को देखते हुए वह आने वाले समय में खेती का विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं. परिवार के लोग भी अपने खेत में तैयार फल खाते हैं और आसपास के लोगों को भी खिलाते हैं.

ड्रैगन फ्रूट की खेती में इन बातों का रखें ध्यान

ड्रैगन फ्रूट कैक्टस परिवार का फल है. इसकी खेती के लिए अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी, पर्याप्त धूप और पौधों को सहारा देने के लिए मजबूत पिलर की जरूरत होती है. खेत में पानी जमा रहने से पौधों को नुकसान हो सकता है, इसलिए सिंचाई और जलनिकासी का संतुलन जरूरी है.

इस फल में फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. हालांकि, इसकी खेती शुरू करने से पहले स्थानीय मिट्टी, मौसम, पौधों की उपलब्धता, बाजार और बिक्री की संभावनाओं की जानकारी लेना जरूरी है.

दूसरे किसानों के लिए भी नई संभावना

सतीश प्रसाद कुशवाहा का अनुभव बताता है कि इंटरनेट से जानकारी लेकर नई फसलों के प्रयोग किए जा सकते हैं. हालांकि, हर किसान की लागत और कमाई जमीन, मौसम, उत्पादन तथा बाजार भाव के अनुसार अलग हो सकती है.

सतीश अब अपनी खेती का दायरा बढ़ाना चाहते हैं. उनकी पहल उन किसानों के लिए एक उदाहरण है, जो पारंपरिक खेती के साथ आमदनी के नए विकल्प तलाश रहे हैं.

ये भी पढ़ें: HR का शातिर दिमाग! पहले करोड़ों रुपए ट्रांसफर किये, फिर कंपनी का सर्वर डाटा किया डिलीट और हुआ रफू चक्कर