Monday, 12 October 2026
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चंपारण तटबंध टूटने से उजड़े सैकड़ों घर, 10 दिनों से तंबुओं में कट रही जिंदगी

INT News12 October 2026 at 01:06 pm

बिहार में बाढ़: पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड की बथना और फुलिया खांड पंचायतों में चंपारण तटबंध टूटने के बाद आई बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदल दी है. किसी का घर उजड़ गया, तो किसी की वर्षों की मेहनत से जुटाई गई जमा-पूंजी गंडक नदी की धारा में समा गयी. जिन घरों में कुछ दिन पहले तक परिवार के भविष्य के सपने बुने जा रहे थे, वहां अब बर्बादी और बेबसी का मंजर है. कई परिवार पिछले करीब 10 दिनों से तंबुओं में रहने को मजबूर हैं. पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें समय पर भोजन नहीं मिला और उनकी परेशानी जानने के लिए अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचे.

10 लाख लगाकर बनाया था आशियाना, अब तंबू में गुजार रहे दिन

बाढ़ ने प्रभावित परिवारों के वर्षों के संघर्ष पर पानी फेर दिया है. इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने दिन-रात मेहनत-मजदूरी कर पाई-पाई जोड़ी और परिवार के लिए पक्का मकान बनाया. किसी ने अपनी पूरी जमा-पूंजी घर बनाने में लगा दी, तो किसी ने करीब 10 लाख रुपये खर्च कर आशियाना तैयार किया था.

लेकिन तटबंध टूटने के बाद आई बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया. जिन घरों को बनाने में वर्षों लग गये, उन्हें छोड़कर अब परिवार खुले स्थानों पर तंबुओं के सहारे रह रहे हैं. पीड़ितों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि घर और जमा-पूंजी गंवाने के बाद वे दोबारा सामान्य जिंदगी कैसे शुरू करेंगे.

बेटी की शादी के सपने पर भी बाढ़ की मार

बाढ़ ने लोगों से केवल घर और सामान ही नहीं छीना, बल्कि भविष्य की योजनाओं को भी गहरा झटका दिया है. पीड़ित परिवारों के मुताबिक, कुछ घरों में बेटियों की शादी की तैयारियां चल रही थीं. शादी के लिए पैसे और जरूरी सामान जुटाये जा रहे थे, लेकिन बाढ़ की तबाही ने उनकी तैयारियां बिखेर दीं.

जिन घरों में शादी की खुशियां मनाने की तैयारी थी, वहां अब भोजन, सुरक्षित ठिकाने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चिंता है. परिवारों का कहना है कि पहले उन्हें अपना जीवन फिर से पटरी पर लाने की चुनौती से जूझना पड़ रहा है.

10 दिनों से तंबुओं में रह रहे परिवार, भोजन की भी चिंता

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए रहने और खाने का इंतजाम बड़ी चुनौती बना हुआ है. पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें समय पर भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया. बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ तंबुओं में रह रहे परिवारों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में उन्हें पर्याप्त राहत और मदद की जरूरत है. अस्थायी ठिकानों पर दिन गुजार रहे परिवारों को अब भी सुरक्षित आश्रय और जरूरी सुविधाओं का इंतजार है.

प्रशासन ने राहत सामग्री देने की बात कही

पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं का जायजा लेने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. वहीं, प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सभी को राहत सामग्री दी गयी है. ऐसे में राहत वितरण की स्थिति और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचने की वास्तविक स्थिति की पुष्टि जरूरी है.

पीड़ित परिवारों ने पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित आश्रय और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है. साथ ही, बाढ़ में क्षतिग्रस्त या पूरी तरह बर्बाद हुए घरों का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा देने की मांग भी उठायी है.

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