समाचार · हरियाणा
अंबाला कैंट मंडी में नालियां जाम होने से हुआ नुकसान:किसानों का दावा- तिरपाल से नहीं बची फसल, सचिव बोले- पहले ही कर ली थी तैयारी
अनाज मंडियों में खुले में पड़ी धान की फसल पर बारिश आफत बनकर बरसी। अंबाला कैंट की अनाज मंडी में बारिश के कारण किसानों की धान भीग गई। किसानों का आरोप है कि मंडी में नालियां साफ नहीं होने के कारण पानी जमा हो गया, जिससे खुले में पड़ी फसल को नुकसान पहुंचा। किसानों का कहना है कि बारिश से बचाव के लिए आढ़तियों की ओर से किए गए तिरपाल के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं थे। हालांकि, कुछ किसानों ने ज्यादा नुकसान नहीं होने की बात भी कही। धान का सीजन पीक पर है। फसल जल्दी पकने के कारण किसान सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही मंडियों में धान लेकर पहुंचने लगे थे। खरीद में देरी को लेकर किसानों को विरोध भी करना पड़ा। अब बारिश के कारण मंडी में खुले में रखी धान भीगने से किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। बारिश के बाद मौसम खुलने पर किसान अपनी भीगी हुई धान को सुखाने में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि फसल को दोबारा सुखाने के बाद ही खरीद के लिए तैयार किया जा सकेगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है। नालियों का पानी जमा होने से फसल भीगने का आरोप किसानों के मुताबिक, मंडी में नालियां साफ नहीं होने के कारण बारिश का पानी जमा हो गया। इससे खुले में रखी धान प्रभावित हुई। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते निकासी के इंतजाम किए जाते तो नुकसान को कम किया जा सकता था। हालांकि, बारिश से फसल को हुए नुकसान को लेकर किसानों की राय अलग-अलग रही। कुछ किसानों ने नुकसान ज्यादा होने की बात कही, जबकि कुछ के अनुसार फसल को बहुत अधिक नुकसान नहीं हुआ। मंडी सचिव बोले- नुकसान की सूचना नहीं मंडी सचिव नीरज भारद्वाज के अनुसार, अंबाला कैंट अनाज मंडी में अब तक 3,691 गेट पास जारी हो चुके हैं। मंडी में 2.54 लाख क्विंटल धान की आवक हुई है, जबकि 1.82 लाख क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। वहीं, 85,612 क्विंटल धान का उठान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि बारिश जरूर हुई थी, लेकिन आढ़तियों ने पहले से ही धान को तिरपाल से ढकने की व्यवस्था की हुई थी। उनके अनुसार, बारिश से धान को नुकसान होने की कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धान को सुखाकर ही मंडी में लेकर आएं। सरकार की ओर से निर्धारित नमी के मानक के अनुसार ही धान की खरीद की जाएगी। इससे खरीद प्रक्रिया समय पर पूरी करने में मदद मिलेगी।