समाचार · झारखंड
SIR के खिलाफ दिल्ली में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, झारखंड के मंत्री-विधायक और नेता हुए शामिल

रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट
रांची/नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार पर संभावित असर के विरोध में दिल्ली में आयोजित आंदोलन में शामिल होने के लिए झारखंड कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं. नई दिल्ली स्थित न्यू झारखंड भवन में राज्य के मंत्री, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा लगा है. कांग्रेस इस आंदोलन के जरिये मतदाता सूची की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उठाना चाहती है.
न्यू झारखंड भवन में जुटे मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता
दिल्ली पहुंचे प्रमुख नेताओं में झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, कांके विधायक सुरेश बैठा, जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू और रामगढ़ विधायक ममता देवी शामिल हैं. इनके अलावा कांग्रेस नेता रमा खलखो, पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी आंदोलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं. पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंच रहे हैं.
केशव महतो कमलेश की अगुवाई में जुट रहे कार्यकर्ता
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अगुवाई में झारखंड के अलग-अलग जिलों से पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के दिल्ली पहुंचने का सिलसिला जारी है. कांग्रेस संगठन इस आंदोलन में राज्य के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिये अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में है. पार्टी की ओर से इसे केवल राजनीतिक विरोध का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और आम नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा से जुड़ा अभियान बताया जा रहा है. नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
SIR की प्रक्रिया पर कांग्रेस ने उठाये सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. पार्टी का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है. कांग्रेस ने आशंका जतायी है कि SIR के कारण देश के करोड़ों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से प्रभावित हो सकते हैं. पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. इसमें किसी पात्र नागरिक का नाम छूटने या गलत तरीके से हटाये जाने की स्थिति में उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किये हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इसमें सभी पात्र नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. कांग्रेस निर्वाचन आयोग से ऐसी व्यवस्था की मांग कर रही है, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर उठ रही आशंकाओं का समाधान हो सके. पार्टी का मानना है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच और उनका समय पर निपटारा जरूरी है.
लोकतंत्र और मतदान के अधिकार को बनाया मुद्दा
कांग्रेस ने अपने आंदोलन को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी ताकत है. पार्टी के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पात्र मतदाताओं के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. किसी भी नागरिक को प्रक्रियागत समस्याओं के कारण अपने मताधिकार से वंचित होने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए स्पष्ट नियम और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है.
इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर में भिड़े भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता, पथराव में दिनेश कुमार समेत 10 से अधिक लोगों के फटे सिर..जानें क्या है वजह
झारखंड के नेताओं ने दर्ज कराया विरोध
दिल्ली में आयोजित इस आंदोलन के माध्यम से कांग्रेस केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है. झारखंड से पहुंचे नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी से पार्टी इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करना चाहती है. हालांकि, SIR को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाये गये आरोप और जतायी गयी आशंकाएं पार्टी का पक्ष हैं. इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पक्ष को भी देखना जरूरी है.
इसे भी पढ़ें: IIIT रांची में छात्र की मौत पर दूसरे दिन भी बवाल, निदेशक के इस्तीफे पर अड़े विद्यार्थी; देखें तस्वीरें