समाचार · बिहार
भागलपुर में 98 लाख के वेतन घोटाले के बाद 6 लिपिकों की प्रतिनियुक्ति रद्द, पूरे बिहार में शिक्षकों के वेतन का होगा शत-प्रतिशत सत्यापन

जिला शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये के वेतन गबन का पर्दाफाश होने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. इस मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है. वहीं, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) सुभाष कुमार गुप्ता ने भागलपुर और बांका जिले के विभिन्न कार्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में प्रतिनियुक्त छह लिपिकों की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हें अपने मूल पदस्थापन कार्यालय में योगदान देने का आदेश जारी किया है.
मूल कार्यालयों में भेजे गए लिपिक
आरडीडीई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी संबंधित लिपिकों को फौरन अपने मूल कार्यालय में योगदान देकर प्रमंडलीय मुख्यालय को सूचित करने का निर्देश दिया गया है:
मो. फाइक (उच्च वर्गीय लिपिक): डायट (DIET), बांका में वापस भेजा गया.
कुमार राहुल एवं देवेंद्र ठाकुर (उच्च वर्गीय लिपिक): जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय, बांका में योगदान देंगे.
राकेश रंजन (उच्च वर्गीय लिपिक): प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, नगरपारा लौटने का निर्देश.
रामानुज सिंह (निम्नवर्गीय लिपिक): जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, भागलपुर में योगदान देंगे.
गौतम कुमार (निम्नवर्गीय लिपिक): मूल कार्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, भागलपुर भेजे गए.
हालांकि आदेश में इन कर्मियों की गबन कांड में सीधी संलिप्तता का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन इसे विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता और व्यवस्था सुधार के रूप में देखा जा रहा है.
राज्यभर में शिक्षकों व कर्मियों के वेतन का होगा शत-प्रतिशत सत्यापन
भागलपुर में उजागर हुए वेतन घोटाले के बाद बिहार सरकार और वित्त विभाग पूरी तरह सख्त हो गए हैं. वित्त विभाग ने राज्यभर के सभी सरकारी शिक्षकों, अधिकारियों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन व भत्तों की शत-प्रतिशत जांच कराने का निर्देश जारी किया है.
अगले माह से पहले सत्यापन अनिवार्य: अगले माह का वेतन विपत्र जारी होने से पहले यह जांच पूरी करनी होगी.
प्रधान सचिव का निर्देश: वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने नौ अक्टूबर को शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर वेतन भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और विसंगतियों को दूर करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं.
मेकर, चेकर और अप्रूवर की तय होगी जवाबदेही
वित्त विभाग के अनुसार, राज्यकर्मियों के वेतन विपत्र एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर बनते हैं और मेकर, चेकर तथा अप्रूवर स्तर पर सत्यापन के बाद सीएफएमएस (CFMS) के जरिए भुगतान किया जाता है. प्रारंभिक जांच में आंकड़ों में कई गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं:
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच: मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक सभी कार्यालयों में वेतन भुगतान की फाइलें खंगाली जाएंगी.
वसूली और दंडात्मक कार्रवाई: गड़बड़ी मिलने पर संबंधित मेकर, चेकर और अप्रूवर की सीधी जवाबदेही तय होगी. दोषी कर्मियों व अफसरों पर आपराधिक व अनुशासनिक कार्रवाई के साथ अवैध तरीके से निकाली गई राशि की वसूली होगी.
नियमित अधिकारियों को जिम्मेदारी: वित्त विभाग ने वेतन भुगतान से जुड़ी मेकर, चेकर और अप्रूवर की जिम्मेदारियां केवल नियमित पदाधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया है.