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प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास भी जरूरी : ऋत्विक मेहता

मेदिनीनगर (पलामू): शहर के साहित्य समाज चौक स्थित मास्टर सोबरन मांझी जिला पुस्तकालय, पलामू में ‘90 मिनट सार्थक पहल : मार्गदर्शन एवं संवाद कार्यक्रम’ का दूसरा सत्र आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रशिक्षु आइएएस सह उपसमाहर्ता ऋत्विक मेहता ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से सीधा संवाद किया. मंजीत कुमार सिन्हा ने उनका स्वागत किया. पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में पुस्तकालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपनी समस्याएं रखीं और तैयारी से जुड़े सवाल पूछे.
केवल लंबे समय तक पढ़ना सफलता के लिए पर्याप्त नहीं
ऋत्विक मेहता ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है. अभ्यर्थियों को अपनी क्षमता का आकलन करने, कमजोरियों को पहचानने और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देने की जरूरत है. नियमित अभ्यास, विषयों की बुनियादी समझ, तार्किक सोच और आत्मविश्वास सफलता की राह आसान बनाते हैं.
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यूपीएससी और जेपीएससी की तैयारी पर हुई चर्चा
संवाद के दौरान यूपीएससी और जेपीएससी की प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार परीक्षाओं की तैयारी में संतुलन बनाने, बार-बार असफल होने पर कमियों का विश्लेषण करने तथा आत्मविश्वास बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई. अभ्यर्थियों ने व्यक्तित्व परीक्षण में अपेक्षित गुणों, तार्किक सोच, समस्या समाधान और सीमित संसाधनों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के उपाय भी पूछे.
असफलताओं से निराश होने के बजाय कमियों को पहचानें
ऋत्विक मेहता ने कहा कि तैयारी के दौरान असफलताओं से निराश होने के बजाय उनका विश्लेषण करना चाहिए. परिवार और समाज की अपेक्षाओं के दबाव में आने के बजाय लक्ष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाये रखना जरूरी है. एसएससी और रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को उन्होंने गति और सटीकता के बीच संतुलन बनाने के लिए नियमित अभ्यास और समयबद्ध मॉक टेस्ट देने की सलाह दी. भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों पर भी चर्चा हुई. उन्होंने समसामयिक घटनाओं को विषयों की बुनियादी समझ से जोड़कर पढ़ने पर जोर दिया.
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हर रविवार होगा मार्गदर्शन एवं संवाद कार्यक्रम
कार्यक्रम का उद्देश्य अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान उपलब्ध कराने के साथ उनके शैक्षणिक, बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देना है. पुस्तकालय प्रशासन के अनुसार, इस पहल के तहत प्रत्येक रविवार को मार्गदर्शन एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. इससे विद्यार्थियों को अनुभवी अधिकारियों से नियमित मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा.