समाचार · उत्तराखंड
उत्तराखंड में 246 मदरसों पर लग चुका ताला; बाकी में बच्चों की थाली और किताबों का संकट

चांद मोहम्मद, देहरादूनउत्तराखंड में मदरसों की नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सवा तीन महीने बाद भी पीएम पोषण योजना के तहत भोजन देने पर स्पष्ट आदेश नहीं हुआ है। कई मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें अधूरी हैं। कक्षा आठ तक धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार होने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया है। सरकार धार्मिक शिक्षा की किताबें उपलब्ध कराएगी या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। उत्तराखंड में 452 पंजीकृत मदरसों में 227 खुद बंद हो गए, जबकि 19 को सील किया जा चुका है।मदरसा बोर्ड 30 जून 2026 को खत्म होने के बाद अब तक शिक्षा विभाग से 76 व अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से 35 मदरसों को मान्यता मिली है। इसके बावजूद बच्चों को भोजन और किताबों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल समेत अन्य जिलों में भी इन सुविधाओं को लेकर परेशानी बताई जा रही हैआदेश का इंतजारपीएम पोषण योजना का लाभ देने के लिए स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है। इस संबंध में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ.सुरजीत सिंह गांधी शिक्षा निदेशालय को पत्र लिख चुके हैं।निदेशालय ने जिलों से विद्यार्थियों की संख्या, यूडाइस नंबर और अन्य जानकारियों के साथ रिपोर्ट मांगी थी। यह जानकारी भेजे जाने के बावजूद योजना शुरू नहीं हुई है। प्राधिकरण का ढांचा स्वीकृत नहीं होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसका प्रस्ताव शासन में लंबित है। वहीं, कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।केबीएन एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव निजाम अख्तर ने कहा कि मदरसों को पीएम पोषण योजना के तहत भोजन नहीं मिल रहा है। पर्याप्त एनसीईआरटी किताबें भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग और बाल अधिकार संरक्षण आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण को पक्षकार बनाकर कोर्ट में नई याचिका दायर करने की चेतावनी दी है।227 मदरसे बंद, 19 को सील किया गयाउत्तराखंड में पहले 452 पंजीकृत मदरसे थे। इनमें से 227 खुद बंद हो गए, जबकि 19 को सील किया गया। प्राधिकरण से 35 मदरसों को मान्यता मिली है और 114 की मान्यता शिक्षा विभाग में लंबित है। मुस्लिम मामलों के जानकार खुर्शीद अहमद सिद्दीकी ने कहा कि खुद बंद मदरसों को लेकर नीति स्पष्ट नहीं है। इनका संचालन समुदाय के चंदे से होता था। उन्होंने सवाल उठाया कि इन मदरसों के बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी कौन लेगा और उनकी निगरानी कैसे होगी?प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी का कहना है कि जो प्रावधान हैं, उनके तहत मदरसों को सभी लाभ मिलेंगे। मिड डे मील के लिए शिक्षा विभाग से लगातार समन्वय कर रहे हैं। किताबों का विषय भी रखेंगे। कक्षा नौ से 12 तक दीनी तालीम का पाठ्यक्रम तैयार हो रहा है। जल्द ही पाठ्यक्रम प्रकाशित होगा।