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सज चुका था मंच, तैयार थे कलाकार, फिर अचानक...बिजनौर में मुस्लिम महिला के इंतकाल पर रोकी गई रामलीला, पेश की मिसाल

UP News:(पवन तोमर की रिपोर्ट) उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिली. जिसने लोगों का दिल जीत लिया. जहां रामलीला की तैयारियां पूरी थीं, मंच सज चुका था और कलाकार भी तैयार थे. लेकिन गांव की बुजुर्ग मुस्लिम महिला गफूरन बी के इंतकाल की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने रामलीला रोकने का फैसला कर लिया. गांव वालों ने तय किया कि पहले सबकी प्यारी बुआ को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी, उसके बाद ही रामलीला का मंचन होगा.
बुआ के इंतकाल की खबर से गांव में छाया मातम
बिजनौर के धामपुर क्षेत्र स्थित मोहड़ा गांव में रामलीला को लेकर तैयारियां जोरों पर थीं. मंगलवार को आयोजन की तैयारियों के बीच शनिवार की शाम बुजुर्ग मुस्लिम महिला गफूरन बी के इंतकाल की खबर आई. यह सुनते ही गांव का माहौल बदल गया. जिनके घरों में रामलीला को लेकर उत्साह था, वहां अब शोक का माहौल छा गया.
बुआ की आखिरी विदाई तक नहीं होगा रामलीला का मंचन
गफूरन बी गांव के लोगों के लिए सिर्फ एक बुजुर्ग महिला नहीं थीं, बल्कि सबकी बुआ जैसी थीं. हिंदू परिवारों में भी उन्हें बड़े-बुजुर्गों जैसा सम्मान मिलता था. उनके इंतकाल से पूरा गांव दुखी था. ऐसे में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि पहले गफूरन बी को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी और उसके बाद ही रामलीला का मंचन होगा. इसी फैसले के तहत एक दिन के लिए पूरा आयोजन स्थगित कर दिया गया.
प्रधान बोले- एक तरफ बुआ की मय्यत, दूसरी तरफ उत्सव कैसे करते?
ग्राम प्रधान ऋषि कुमार ने बताया कि गफूरन बी गांव के सभी लोगों के लिए बुआ के समान थीं. हर कोई उनका सम्मान करता था. उन्होंने कहा कि जब एक तरफ हमारी बुआ की मय्यत हो और दूसरी तरफ हम रामलीला का उत्सव मनाएं, तो यह दिल को मंजूर नहीं था. इसलिए सभी ने मिलकर फैसला किया कि पहले उन्हें सम्मान के साथ विदा किया जाएगा, उसके बाद ही उत्सव मनाया जाएगा.
बिना किसी दबाव के लिया गया फैसला
ग्राम प्रधान ऋषि कुमार के मुताबिक, रामलीला रोकने का फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया. गांव के लोगों ने शोक में डूबे परिवार के दुख को अपना दुख समझा और उनके साथ खड़े रहे.
मोहड़ा गांव ने पेश की हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
मोहड़ा गांव की यह घटना दिखाती है कि आपसी रिश्ते और इंसानियत मजहब से ऊपर होते हैं. गफूरन बी को गांव के हर समुदाय से मिलने वाला सम्मान और उनके इंतकाल पर रामलीला रोकने का फैसला आपसी भाईचारे की मिसाल बन गया. गांव वालों ने यह संदेश दिया कि खुशी के मौके पर उत्सव मनाना जरूरी है, लेकिन किसी अपने के जाने पर उसके परिवार के साथ खड़ा होना भी उतना ही अहम है.
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