Friday, 11 September 2026
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भिवानी में सफाई कर्मचारियों की महापंचायत:JJP व कांग्रेस सहित अन्य संगठनों का समर्थन, बोले- मांगे नहीं मानी तो होगा आंदोलन

INT News11 September 2026 at 03:52 pm

भिवानी के नगर परिषद कार्यालय में नगर पालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें जेजेपी व कांग्रेस सहित अन्य राजनीति दलों व कर्मचारी संगठनों आदि ने समर्थन दिया। साथ ही सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। नगर पालिका एवं अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को 37वें दिन भी जारी रही। जेजेपी जिला अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज व जेजेपी के प्रदेश प्रवक्ता राजु मेहरा ने कहा कि पार्टी सुप्रीमो डॉ. अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला के निर्देश अनुसार पूरे हरियाणा में सभी जिला मुख्यालयों पर डीसी के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन पत्र प्रेषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों को सरकार माने। सफाई कर्मचारी पिछले कई दिनों से हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार सुन नहीं रही। शहर में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगे नहीं मानती तो जननायक जनता पार्टी के कार्यकर्ता उनके संघर्ष व आंदोलन में साथ खड़ा पाएंगे। किसान मोर्चा, किसान सभा, सर्व कर्मचारी संघ से कामरेड ओम प्रकाश, सुखदर्शन सरोहा महापंचायत स्थल नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और कर्मचारियों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े होने का ऐलान किया। सरकार ने सहमति बनी मांगों को भी नहीं किया पूरा

किसान नेताओं एवं सफाई कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने 13 मई को कर्मचारियों की 22 में से 17 मांगों पर सहमति जताई थी। लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद उन मांगों को लागू नहीं किया जा रहा। सरकार की इस वादाखिलाफी के कारण पूरे हरियाणा में नगर पालिका तथा अग्निशमन कर्मचारी 6 अगस्त से हड़ताल पर हैं। शहरों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को लागू करने के बजाय पुलिस और प्रशासन के बल पर कूड़ा उठवाने का प्रयास कर रही है। सरकार पुलिसिया कार्रवाई से आंदोलन दबाना चाहती है

उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं। सरकार बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाने के बजाय दमन और पुलिसिया कार्रवाई के जरिए कर्मचारी आंदोलन को दबाना चाहती है। यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कर्मचारी वर्ग की मांगें कोई नई या अनुचित नहीं हैं। सरकार स्वयं इन मांगों को स्वीकार कर चुकी है। इनमें कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, अग्निशमन विभाग के शहीद कर्मचारियों के परिवारों को 50-50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, उनके आश्रितों को स्थायी नौकरी, 5000 रुपए रिस्क अलाउंस तथा 7500 रुपए वर्दी भत्ता जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। इसके बावजूद इन मांगों को लागू न करना सरकार की स्पष्ट वादाखिलाफी है।